लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :188
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6042
आईएसबीएन :9788170287285

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

57 पाठक हैं

प्रस्तुत है महात्मा गाँधी की आत्मकथा ....


इस जाँच के दौरान में पंजाब की स्त्रियो से तोमैं इस तरह से मिला, मानो मैं उन्हें युगे से पहचानता होऊँ। जहाँ जाता वहाँ दल-के-दल मुझसे मिलते और वे मेरे सामने अपने काते हुए सूत का ढेर लगादेती थी। इस जाँच के सिलसिलो में अनायास ही मैं देख सका कि पंजाब खादी कामहान क्षेत्र हो सकता है।

लोगों पर ढाये गये जुल्मो की जाँच करते हुए जैसे-जैसे मैं गहराई में जाने लगा, वैसे-वैसे सरकारी अराजकता की,अधिकारियों की नादिरशाही और निरंकुशता की अपनी कल्पना से परे की बाते सुनकरमुझे आश्चर्य हुआ और मैंने दुःख का अनुभव किया। जिस पंजाब से सरकार कोअधिक से अधिक सिपाही मिलते है, इस पंजाब में लोग इतना ज्यादा जुल्म कैसेसहन कर सके, यह बात मुझे उस समय भी आश्चर्यजनक मालूम हुई थी और आज भीमालूम होती है।

इस कमेटी की रिपोर्ट तैयार करने का काम भी मुझे ही सौपा गया था। जो यह जानना चाहते है कि पंजाब में किस तरह के जुल्म हुएथे, उन्हे यह रिपोर्ट अवश्य पढनी चाहिये। इस रिपोर्ट के बारे में इतना मैंकह सकता हूँ कि उसमें जान-बूझकर एक भी जगह अतिशयोक्ति नहीं हुई है। जितनीहकीकते दी गयी है, उनके लिए उसी में प्रमाण भी प्रस्तुत किये गये है। इस रिपोर्ट में जितने प्रमाण दिये गये है, उनसे अधिक प्रमाण कमेटी के पासमौजूद थे। जिसके विषय में तनिक भी शंका थी, ऐसी एक भी बात रिपोर्ट में नहीं दी गयी। इस तरह केवल सत्य को ही ध्यान में रखकर लिखी हुई रिपोर्ट सेपाठक देख सकेंगे कि ब्रिटिशा राज्य अपनी सत्ता के ढृढ बनाये रखने के लिए किस हद तक जा सकता है, कैसे अमानुषिक काम कर सकता है। जहाँ तक मैं जानताहूँ, इस रिपोर्ट की एक भी बात आज तक झूठ साबित नहीं हुई।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book