Rajendra Yadav/राजेन्द्र यादव
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लेखक:

राजेन्द्र यादव

जन्म : 28 अगस्त, 1929।

देहावसान : 28 अक्तूबर, 2013

शिक्षा : एम.ए. (आगरा)।

निवास : आगरा, मथुरा, झाँसी, कलकत्ता होते हुए अब दिल्ली।

प्रथम रचना : प्रतिहिंसा (‘चाँद’ के भूतपूर्व संपादक श्री रामरखासिंह सहगल के मासिक ‘कर्मयोगी’ में) 1947।

कृतियाँ :

उपन्यास : सारा आकाश, उखड़े हुए लोग, शह और मात, एक इंच मुस्कान (मन्नू भंडारी के साथ), अनदेखे अनजान पुल, मंत्र-विद्ध और कुलटा, प्रेत बोलते हैं।

कहानी-संग्रह : देवताओं की मूर्तियाँ, खेल-खिलौने, जहाँ लक्ष्मी कैद है, छोटे-छोटे ताजमहल, किनारे से किनारे तक, टूटना, ढोल और अपने पार, वहाँ तक पहुँचने की दौड़, श्रेष्ठ कहानियाँ, प्रिय कहानियाँ, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, प्रेम कहानियाँ, प्रतिनिधि कहानियाँ, चौखटे तोड़ते त्रिकोण, राजेन्द्र यादव संकलित कहानियाँ, अभिमन्यु की आत्महत्या, मेरी पच्चीस कहानियाँ, चर्चित कहानियाँ, अब तक की समग्र कहानियाँ, यहाँ तक : पड़ाव 1, यहाँ तक : पड़ाव 2।

कविता-संग्रह : अवाज तेरी है।

निबंध-समीक्षा : कहानी : स्वरूप और संवेदना, उपन्यास : स्वरूप और संवेदना, कहानी : अनुभव और अभिव्यक्ति, काँटे की बात (बारह खंड), प्रेमचंद की विरासत, वे देवता नहीं हैं।

आत्मकथा : मुड़ मुड़ के देखता हूँ।

संपादन : नये साहित्यकार पुस्तकमाला में मोहन राकेश, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव, फणीश्वरनाथ ‘रेणु’ तथा मन्नू भंडारी की चुनी हुई कहानियाँ। एक दुनिया : समानांतर, कथा-यात्रा, आत्मतर्पण, देहरि भई विदेस।

आलोचना : अठारह उपन्यास।

संस्मरण/पत्र : औरों के बहाने, अब वे वहाँ नहीं रहते।

स्त्री-विमर्श : आदमी की निगाह में औरत, अतीत होती सदी और स्त्री का भविष्य।

किशोरोपयोगी : घर की तलाश, परी नहीं मरती।

उपन्यास : हमारे युग का एक नायक : लर्मेन्तोव, प्रथम प्रेम, वसंत प्लावन : तुर्गनेव, टक्कर, ऐन्तोन चेखव, संत सर्गीयस : टाल्सस्टाय, एक मछुआ : एक मोती : स्टाइन बैंक, अजनबी : अलबेयर कामू, काली सुर्खियाँ।

साक्षात्कार : मेरे साक्षात्कार : राजेन्द्र यादव।

नाटक : हंसनी, चेरी का बगीचा, तीन बहनें : चेखव।

कहानियाँ : नरक ले जाने वाली लिफ्ट।

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