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दुर्दम्य
दुर्दम्य
प्रकाशक :
भारतीय ज्ञानपीठ |
प्रकाशित वर्ष : 2003 |
पृष्ठ :800
मुखपृष्ठ :
सजिल्द
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पुस्तक क्रमांक : 10436
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आईएसबीएन :812630930X |
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स्वतन्त्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है के उदघोषक, आधुनिक भारत के निर्माता बाल गंगाधर तिलक पर लिखा गया असाधारण उपन्यास है 'दुर्दम्य'.
"स्वतन्त्रता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है" के उदघोषक, आधुनिक भारत के निर्माता बाल गंगाधर तिलक पर लिखा गया असाधारण उपन्यास है 'दुर्दम्य'. तिलक को भारतीय असन्तोष का जनक माना जाता है. एक ओर तो उनके तेजस्वी व्यक्तित्व के प्रभा-मण्डल से अँग्रेज तक चकाचौंध हो गए थे, दूसरी ओर स्वयं भारतीय उनकी विलक्षण विचारधारा और असामान्य राजनीतिक भूमिका के स्वरुप को लेकर एक मत नहीं हो पाए. तिलक जी के फौलादी, दुर्दम्य, तूफानी और बहुआयामी व्यक्तित्व से साक्षात्कार करने वाला है यह उपन्यास.
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