रहस्य-रोमांच >> घर का भेदी घर का भेदीसुरेन्द्र मोहन पाठक
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अखबार वाला या ब्लैकमेलर?
“अपनी बात कहने के लिये मैं ये मान के चल रही हूं कि किसी करिश्मासाज तरीके
से मेरे मुंह से निकली वो बातें भी तुम्हें मालूम हैं जो कि नहीं मालूम होनी
चाहिये थीं, नहीं मालूम हो सकती थीं। तुम इन्स्पेक्टर चानना से मेरे पुराने
ताल्लुकात की बाबत जानते हो और संजीव सूरी से मेरे मौजूदा ताल्लुकात की बाबत
जानते हो। संजीव सूरी कल रात यहां था, मैंने उसे इस बाबत झूठ बोलने के लिये
कहा था लेकिन तुमने उससे सच कुबुलवा लिया था। मेरा अन्देशा ये है कि पुलिस को
जब ये बात मालूम होगी तो इन्स्पेक्टर चानना संजीव के पीछे पड़ जायेगा।"
“आपका मतलब ये है कि कोई व्यक्तिगत खुन्दक निकालने के लिये आपका एक्स आपके
प्रेजेन्ट के पीछे पड़ सकता है?"
"हां। चानना आज तक भी अपने दिल से मुझे निकाल नहीं पाया मालूम होता। उसे ये
बात नागवार गुजर सकती है कि उसके अलावा मेरा कोई और दावेदार भी है।" .
"लिहाजा वो संजीव सूरी को आपके पति के कत्ल के इल्जाम में फंसा कर अपना एक
कम्पीटीटर खत्म करने की कोशिश कर, सकता है?"
"हां"
"आप कल तक एक शादीशुदा औरत थीं, आज एक ब्रान्ड न्यू विधवा हैं, फिर भी आप
अपने भूतपूर्व प्रेमी से अपने अफेयर को हवा दे रही हैं?"
"मैं नहीं दे रही। वो दे रहा है।"
"हामी तो आपकी भी है न! वरना ये बात जिक्र के काबिल ही न होती।". . .
"पुराने ताल्लुकात आसानी से नहीं भुलाये जाते।"
"लेकिन आसानी से तोड़ जरूर दिये जाते हैं। उन ताल्लुकात को तोड़कर ही तो आपने
बतरा से शादी की थी।"
“वो शादी एक हादसा था, बहुत बड़ा हादसा था मेरी जिन्दगी का। जब कोई बड़ा
हादसा होता है तो उसकी चपेट में कोई भी आ सकता है। समझ लो कि चानना उस हादसे
की चपेट में आ गया था।"
“या आपने बतरा के साथ अपने सम्भावित उज्जवल भविष्य की खातिर उसकी बलि दे दी
थी?" उससे जवाब देते न बना।
हैरानी की बात है कि बतरा से नाउम्मीद होने के बाद आपको अपना पुराना
ब्वायफ्रेंड याद न आया, आपने संजीव सूरी की सूरत में एक नया खिलौना तलाश कर
लिया अपनी दिलजोई के लिये।"
“तुम तो मुझे जलील करने की कोशिश कर रहे हो।"
"अच्छा !" .
"इस वक्त हम दोनों के बीच में जो मुद्दा है, वो मेरा मारल कैरेक्टर नहीं है।
मैंने जिन्दगी में कोई गलत फैसले किये हो सकते हैं। लेकिन ऐसा किसी के साथ भी
हो सकता है। एक खता खाई औरत भटक सकती है, और कहीं से भी आसरा तलाश कर सकती
है। शादी से पहले मेरा.चानना से अफेयर था लेकिन शादी के बाद उसने मेरी
जिन्दगी में दोबारा कदम रखने की कभी कोशिश नहीं की थी। जब उसने मुझे बताया था
कि वो आज भी मुझे चाहता था तो मैं सख्त हैरान हुई थी। कैसे मालूम होती मुझे
ये बात? दो साल में कभी सूरत तक तो दिखाई नहीं थी उसने मुझे।"
“जो सूरत दिखाई देती थी, वो संजीव सूरी की थी?"
"हां। और मेरी गुजश्ता उजाड़ जिन्दगी में जो थोड़ी बहुत बहार आयी थी, वो
संजीव की वजह से आयी थी।"
“आप उससे मुहब्बत करती हैं?"
“पता नहीं।"
“क्यों पता नहीं? सच्चे प्यार का जादू तो सिर पर चढ़ के बोलता है।"
"मेरे सिर पर चढ़ के नहीं बोला। मैं नहीं जानती सच्चा प्यार क्या होता है!
जानती होती तो कभी गोपाल से शादी न करती। संजीव मुझे अच्छा लगता है। मेरा दिल
मुझे उसकी तरफ ले जाता है लेकिन मैं नहीं जानती कि ऐसा सच्चे प्यार की वजह से
होता है या सिर्फ भौतिक आकर्षण की वजह से।"
"वो क्या कहता है?"
“वो तो खम ठोक कर मेरी मुहब्बत का दम भरता है।"
"वो झूट वोलता है। मैं कल रात उससे मिला था। उसने बुरी से बुरी बात आपके
खिलाफ कही थी। उसकी कही हर बात दोहराऊं तो आपका खून खौल जायेगा। एक बात फिर
भी कहता हूं। आपको 'ईजी ले (EASY LAY) कह रहा था। मतलब । समझती हैं न आप 'ईजी
ले' का?"
"वो कहता था कि ऐसी बातें तुमने उससे जबरन कुबुलवा ली थी जबकि उसके मन में
ऐसा कुछ नहीं था। हजार हजार माफियां मांग रहा था मेरे से ऐसा कहा होने की वजह
से।"
"लगता है कि आप तो उसे माफ कर भी चुकी हैं।" वो खामोश रही।
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