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पर्यावरण एवं विज्ञान >> मेवात का जोहड़

मेवात का जोहड़

राजेन्द्र सिंह

प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2012
पृष्ठ :180
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 14058
आईएसबीएन :9788126723348

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युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है।

मेवात कैसे बना? मेवात का जनमानस आज क्या चाहता है ? क्या कर रहा है ? मेवात के संकट से जूझते लोग, बाजार की लूट, पानी और खेती की लूट रोकने की दिशा में हुए काम–––कुदरत की हिफाजत के काम हैं। इन कुदरती कामों में आज भी महात्मा गांधी की प्रेरणा की सार्थकता है। युगपुरुष बापू के चले जाने के बाद भी युवाओं द्वारा उनसे प्रेरित होकर ग्राम स्वराज, ग्राम स्वावलम्बन के रचनात्मक कार्यों से लेकर सत्याग्रह तक की चरणबद्ध दास्तान इस पुस्तक में है। यह पुस्तक देश–दुनिया और मेवात को बापू के जौहर से प्रेरित करके सबकी भलाई का काम जोहड़ बनाने–बचाने पर राज–समाज को लगाने की कथा है जौहर से जोहड़ तक की यात्रा है। यह पुस्तक आज के मेवात का दर्शन कराती है। इसमें जोहड़ से जुड़ते लोग, पानी की लूट रोकने का सत्याग्रह, मेवात के 40 शराब कारखाने बन्द कराना तथा मेवात के पानीदार बने गाँवों का वर्णन है। मेवात की पानी, परम्परा और खेती का वर्णन बापू के जौहर से जोहड़ तक किया है। बापू कुदरत के करिश्मे को जानते और समझते थे। इसलिए उन्होंने कहा था ‘‘कुदरत सभी की जरूरत पूरी कर सकती है लेकिन एक व्यक्ति के भी लालच को पूरा नहीं कर सकती है।’’ वे कुदरत का बहुत सम्मान करते थे। उन्हें माननेवाले भी कुदरत का सम्मान करते हैं। मेवात में उनकी कुछ तरंगें काम कर रही थीं। इसलिए मेवात में समाज–श्रम से जोहड़ बन गए। मेवात में बापू का जौहर जारी है। यह पुस्तक बापू के जौहर को मेवात में जगाएगी।

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