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जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग सत्य के प्रयोगमहात्मा गाँधी
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my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...
सरकार उन्हें पकड़े बिना भला कैसे रहती? मोहनलालपंडया और उनके साथी पकड़े गये। इससे लोगों का उत्साह बढ़ गया। जहाँ लोग जेल इत्यादि के विषय में निर्भय बन जाते है, वहाँ राजदंड लोगों को दबानेके बदले उनमें शूरवीरता उत्पन्न करता है। अदालत में लोगों के दल-के-दल मुकदमा देखने को उमड़ पड़े। मोहनलाल पंडया को और उनके साथियो कोथोडे-थोड़े दिनो की कैद की सजा दी गयी। मैं मानता हूँ कि अदालत का फैसला गलत था। प्याज उखाडने का काम चोरी की कानूनी व्याख्या की सीमा में नहींआता था। पर अपील करने की किसी की वृति ही न थी।
जेल जानेवालो को पहुँचाने के लिए एक जुलूस उनके साथ हो गया और उस दिन से मोहनलाल पंडया कोलोगों की ओर से 'प्याजचोर' की सम्मानित पदवी प्राप्त हुई, जिसका उपभोग वे आज तक कर रहे है।
इस लड़ाई का कैसा और किस प्रकार अन्त हुआ, इसका वर्णन करके हमखेड़ा-प्रकरण समाप्त करेंगे।
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