समय 25 से 52 का - दीपक मालवीय Samay 25 Se 52 Ka - Hindi book by - Deepak Malviya
लोगों की राय

नई पुस्तकें >> समय 25 से 52 का

समय 25 से 52 का

दीपक मालवीय

प्रकाशक : भारतीय साहित्य संग्रह प्रकाशित वर्ष : 2020
पृष्ठ :120
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 15415
आईएसबीएन :978-1-61301-664-0

Like this Hindi book 0

5 पाठक हैं

युवकों हेतु मार्गदर्शिका

Samay 25 se 52 ka-a Self-help Book by Er. Deepak Malviya

संघर्ष की कसौटी को
वीर रस की तलवार से छलनी करते हुये
लेखक के कुछ शब्द...

ए बन्दे तू जिन्दगी कुछ शान से जी
कुछ अभिमान से जी, थोड़ा गुमान से जी ।
ए बन्दे तू जिन्दगी जरा शान से जी

गर पाना हो सफलता तुझे तो
तेरे लिये नहीं जिन्दगी चार-दिन की
कर हौसलों को बुलन्द अपने,
इन पर्वतों से कह दे, अपनी औका़त में जी,
तू मत ढूँढ़ना अपने सपनों को हाथों की लकीरों से,
बल्कि सींच देना मेहनत की फसल को अपने पसीने से।
बन्दे तू जिन्दगी में कुछ ठान के जी,
ए बन्दे तू जिन्दगी में कुछ ठान के जी,
कुछ मान के जी, कुछ मनवा के जी।

तू सह लेना इस दुनिया की मार,
पर मत सहना कभी वक़्त की मार,
ये जिन्दगी तुझे जब ठोक बजा के परखेगी....
तेरी हिम्मत को नापेगी,
उपलब्धियों को तोलेगी।
लकीरें सजेंगी जब मेहनत के रंग से....
फिर तू कलेजा हमेशा थाम के बैठना
और
जिन्दगी फिर कुछ शान से जीना।


दो शब्द

आज की युवा पीढ़ी और महानगर के लोग इंटरनेट की वजह से ‘दुनिया जेब में लिये घूमते हैं।’ और दुनिया को बाथरूम में भी ले जाते हैं और रात को तकिए के पास रखकर सुला भी लेते हैं। परन्तु प्रकृति पहिया निरन्तर अपनी गति से घूमता रहता है। फलस्वरूप व्यक्तित्व की सोच भी निरन्तर बदलती रहती है। यही कारण है कि आज हर जगह इंटरनेट उपलब्ध होने के बावजूद भी लोग पुस्तकों को पसन्द कर रहे हैं।

प्रस्तुत पुस्तक ‘समय 25 से 52 का’ आज और भविष्य की भावी युवा पीढ़ी के लिये समर्पित है। विशेषकर संघर्षशील व्यक्तियों के लिये जो एक ‘छात्र, नेता, अभिनेता, खिलाड़ी, छोटे उद्यमी तथा लक्ष्य साध चुके व्यक्ति’ हैं। इन लोगों की प्रारम्भिक समस्या तथा इन पर धीरे-धीरे कैसे विजय पाए इसका वर्णन है इसके अन्तर्गत। दोस्तों किसी के भी जीवन का ‘25वाँ साल’ वो सुनहरा समय होता है जब हम अपने सपनों की नींव को मेहनत की ईंट से मजबूत करने में लगे रहते हैं या फिर ईश्वर ने जिसे जिस सिद्धांत के लिये बनाया है उसे सिद्ध कर रहे होते हैं। हर किसी के जीवन का ये समय करेले से कम नहीं होता।

पुस्तक में ये बताया गया है कि कैसे ‘शारीरिक-मानसिक, आर्थिक-सामाजिक’ समस्याओं के अंधकार को चीरते हुये, सफलता की किरण को पाना है। कैसे करेले की कड़वाहट को गुड़ की मिठास में बदलना है। प्यारे उम्मीदार्थियों हमेशा हँसते रहो - खुश रहो क्योंकि तुम्हारा हँसना मुस्कुराना तुम्हारे दुश्मन (असफलता, नकारात्मकता) को कभी अच्छा नहीं लगेगा।

- इंजी. दीपक मालवीय

विषय क्रम

इस किताब की विषय-सूची आपकी जिन्दगी की किताब से हूबहू मेल खाती है। एक संघर्ष करने वाले युवक/युवती के जीवन के अलग-अलग पड़ाव पर जो-जो समस्याएं/मुसीबतें आती हैं वैसे-वैसे ही इस किताब के पन्नों में उन्हीं चैप्टर का वर्णन और निवारण आता जायेगा।

1  सपने देखना सबका हक

2  देर न करिए

3  एक अच्छी और सच्ची शुरुआत

4  नकारात्मकता में न उलझें

5  लोगों को सोचने दो़

6  जिन्दगी आसान नहीं

7  एक परीक्षा सबकी

8  घबरायें नहीं रुकें नहीं

9  सोचना बन्द न करें

10  सब्र तो रखना पड़ेगा

11  चिन्ता न करें

12  सफलता लकीरों की मोहताज नहीं

13 क़ीमती समय

14  सब सम्भव है

15  सही सोच के साथ

16  वक़्त के सिखाने से पहले सीखें

17  दूसरों की कामयाबी से सीखें

18  कुछ ठान के मान बढ़ाना है

19  मंजिल आख़िर मिल जाती है

20  मुखपृष्ठ विषय

 

 

आगे....

प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

लोगों की राय

No reviews for this book