जीवन कथाएँ >> लज्जा लज्जातसलीमा नसरीन
|
360 पाठक हैं |
प्रस्तुत उपन्यास में बांग्लादेश की हिन्दू विरोधी साम्प्रदायिकता पर प्रहार करती उस नरक का अत्यन्त मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया है...
1979 में 14 मार्च की रात नौ बजे गोपालगंज शहर में उपजिला निजड़ा पूर्वपाड़ा कालीमंदिर में मुसलमानों ने हमला किया और मंदिर को क्षति पहुँचाई। उलपुर के शिवमंदिर का ताला तोड़कर शिवलिंग समेत कीमती सामानों की चोरी कर ली गयी।
कुष्टिया जिला शहर के थानापाड़ा में 17 अक्तूबर 1988 को दुर्गा प्रतिमा तोड़ दी गयी।
खुलना जिले के सदर पाल वाजार में बाजार के कुछ मुसलमानों ने पूजा आरम्भ होने के पहले ही मूर्तियों को तोड़ डाला।
एक अक्तूबर 1988 को खुलना जिले के प्रसिद्ध श्री श्री प्रणवानन्द जी महाराज आश्रम की दुर्गा प्रतिमा तोड़ दी गयी।
खुलना में डुमुरिया उपजिला के मधुग्राम में मस्जिद के इमाम ने शारदीय दुर्गोत्सव से पहले इलाके के सभी पूजा मण्डपों में चिट्ठी भेजकर इत्तिला दे दी कि हर बार जब-जब अजान होगी और नमाज पढ़ी जायेगी, पूजा का सब कार्यक्रम बंद रखा जायेगा। यह चिट्ठी 17 अक्तूबर को पहुंची थी।
अक्तूबर के प्रथम सप्ताह में खुलना जिला शहर में साम्प्रदायिकों के एक जुलूस में नारा लगाया जा रहा था-'मूर्ति पूजा नहीं चलेगी, तोड़ दो, चूर-चूर कर दो!'
कुष्टिया में कुमारखाली उपजिला के कालीगंज बाजार में पूजा से पहले जो मूर्ति बनाई जा रही थी, उसे भी तोड़ दिया गया।
गाजीपुर में कालीगंज बाजार के काली मंदिर में पूजा से पहले बनाई जा रही मूर्ति भी तोड़ दी गयी।
30 सितम्बर को सातक्षीरा में श्यामनगर उपजिला के नाकीपुर गाँव के हरितला मंदिर में भी पूजा से पहले मूर्ति को तोड़ दिया गया।
फीरोजपुर जिले में भानुरिया उपजिला के काली मंदिर की दीवार तोड़कर ड्रेन (नाली) बनाया गया है।
बरगुना जिले के फूलझुरी बाजार की दुर्गा प्रतिमा पर विजयादशमी के दिन कट्टरपंथियों का हमला हुआ। बामना उपजिला में बुकाबुनिया यूनियन की दुर्गा प्रतिमा को पूजा शूरू होने के दो-चार दिन पहले तोड़ दिया गया। इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी।
|