Ek Apavitra Ped - Hindi book by - Priyamvad - एक अपवित्र पेड़ - प्रियंवद
लोगों की राय

कहानी संग्रह >> एक अपवित्र पेड़

एक अपवित्र पेड़

प्रियंवद

प्रकाशक : भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशित वर्ष : 1997
पृष्ठ :167
मुखपृष्ठ : सजिल्द
पुस्तक क्रमांक : 375
आईएसबीएन :00-000-00

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

152 पाठक हैं

जीवन की विराटता को समेटे हुए अत्यन्त चर्चित और लोकप्रिय कथाकार प्रियंवद का एक महत्वपूर्ण कथा-संग्रह

Ek Apavitra Ped - A Hindi Book by - Priyamvad एक अपवित्र पेड़ - प्रियंवद

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

चीख की नोक पर टंगी आत्माएं?... ग्रीक मासलता.... गर्भगृहों की अन्धकार को चीरती नन्ही सी लौ... वृक्ष से टूटती पत्ती की नर्तन- यह सब प्रियंवद की कहानियों के स्वर हैं। जीवन की रहस्यमयताओं को खोलती-ढूढ़ती यह कहानियाँ पाठक को धीरे धीरे अवसाद, प्रेम, प्रकृति, मिथक, मानवीय मूल्यों और व्यवस्थाओं की क्रूर शोषक दुनिया में ले जाती हैं - धीरे धीरे मन की एक एक परत को खोलती और उसके एक एक अंधेरे कोने को टटोलती हुई।

प्रियंवद की इन कहानियों की भाषा में एक नई चमक है - धीरे धीरे खुलती एक कविता गुगुनाते छन्द की तरह। एक ठण्डा अवसाद भी वह पैदा करती है जो चुपचाप वह आत्मा पर परत-दर-परत चढ़ता जाता है। इस संग्रह में संकलित प्रियंवद की कहानियाँ उनकी परिपक्वता, संवेदनशीलता, कल्पना और मानवीय आस्था को उजागर करती हैं।

प्रथम पृष्ठ

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book