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रवि कहानी

अमिताभ चौधरी

प्रकाशक : नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :85
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 474
आईएसबीएन :81-237-3061-6

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नेशनल बुक ट्रस्ट की सतत् शिक्षा पुस्तकमाला सीरीज़ के अन्तर्गत एक रोचक पुस्तक


इसके बाद सिर्फ गीत या जुलूस नहीं, सभी प्रकार की विलायती चीजों का बॉयकाट शुरूहो गया। अंग्रेज सरकार ने एक आदेश जारी करके स्कूल-कालेज के छात्रों को इस स्वदेशी आंदोलन में भाग लेने से रोकना चाहा। जनता ने एक सभा में फैसलाकिया कि लोग सरकारी विश्वविद्यालय और सरकारी नौकरी छोड़ दें। बंगाल में आंदोलन फैल गया, हर जगह बॉयकाट शुरू हुआ। पूरा बंगाल बेहद नाराज था। उसीसमय सरकारी शिक्षा का विरोध जताने के लिए डॉन सोसाइटी के प्रयासों से राष्ट्रीय विद्यालय शुरू हुए-जादवपुर विश्वविद्यालय इसी का फल है। लोगोंके जबर्दस्त विरोध, आंदोलन और बहिष्कार के कारण आखिरकार सरकार को मजबूरन बंगाल का बंटवारा रद्द करना पड़ा। राष्ट्रीय शिक्षा परिषद में रवीन्द्रनाथने अपने कई भाषणों में लोगों को बताया कि हमारे देश की सही शिक्षा नीति कैसी होनी चाहिए। इसी बीच रवीन्द्रनाथ अगरतला, कुमितला और बरीसाल घूम आए।वहां उन्होंने भाषण भी दिए।

रवीन्द्रनाथ शांतिनिकेतन लौटे।उन्होंने अपने बेटे रथीन्द्रनाथ को कृषि विज्ञान पढ़ाने के लिए अमरीका भेजा। छोटी बेटी मीरा की शादी नगेन्द्रनाथ गंगोपाध्याय से कर दी। शादी केबाद वे अपनी बेटी और दामाद के साथ दामाद के जिले बरीसाल घूम आए। इसके बाद उन्होंने अपने छोटे दामाद को भी अमरीका कृषि विज्ञान पढ़ने भेजा। इसी तरहअपने दोस्त श्रीशचंद्र मजुमदार के बेटे संतोषचंद्र मजुमदार को भी गो पालन की पढ़ाई के लिए अमरीका भेजा। अमरीका से वापस लौटने के बाद उन्होंनेरथीन्द्रनाथ की शादी एक बाल विद्यवा प्रतिभा देवी से कर दी। रथीन्द्रनाथ को उन्होंने जमींदारी की देखभाल के लिए भेज दिया। जहां प्रजा के हित केलिए पिता के कहने पर खेतों में उन्होंने ट्रैक्टर भी चलाया।

रवीन्द्रनाथ अपना लेखन लगातार जारी रखे हुए थे। वे कविताएं और लेख तो लिख ही रहे थे,इसके अलावा उन्होंने ''प्रवासी'' पत्रिका के लिए ''मास्टर मोशाय'' (मास्टर जी) नाम से एक बड़ी कहानी भी लिखी। कुछ दिनों बाद उन्होंने ''गोरा''उपन्यास धारावाहिक रूप से लिखना शुरू किया।

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