शेर बड़ा या मोर - भगवतशरण उपाध्याय Sher Bada Ya Mor - Hindi book by - Bhagwat Sharan Upadhyay
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शेर बड़ा या मोर

भगवतशरण उपाध्याय

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2010
पृष्ठ :40
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 5868
आईएसबीएन :9788170285151

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प्रस्तुत हैं कहानियाँ....

Sher Bada Ya Mor

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

मरा हुआ शरीर गोद में लेकर रोने लगी। पर अब क्या हो सकता था। अगर उसने जल्दी न की होती, गुस्सा न किया होता, भीतर जाकर अपने बच्चे को देख लेता, तो उसका बच्चा सोता मिलता और नेवले की जान बच जाती। इससे बेटे, जल्दी में, गुस्से में, बगैर सोचे-विचार कोई काम नहीं करना चाहिए। वरना नेवले और ब्राह्मण वाली ही हाल होता है।

 

तुम्हारा बाबा।

 

शेर बड़ा या मोर

 

प्रिय बेटे क्षेमेन्द्र,
मैं बहुत दिनों से चाहता था कि तुम्हें एक लम्बी चिट्ठी लिखूं। लंबी चिट्ठी इसलिए कि उसमें तुम्हारे लिए एक कहानी भी लिखूं। और जब कहानी लिखूँगा तब तो चिट्ठी लंबी हो जाएगी। पर कहानी वाली चिट्ठी के लिए वक्त भी बहुत चाहिए, और मिलता नहीं। इससे आज तक कहानी नहीं लिख पाया था। आज मैंने सोचा कि आज मैं अपने बेटे के लिए एक कहानी ज़रूर लिखकर भेजूंगा, चाहे कितना वक्त लगे। सो बेटे, मैं तुम्हें कहानी लिखकर भेज रहा हूं।
सुनो:
बहुत दिनों की बात है, जंगल में बहुत-से जानवर रहते थे, जैसे आज भी रहते रहते हैं- सिंह और चीते, रीछ हाथी, भेड़िये, सियार, सांड़, बन्दर हिरन, खरगोश। सिंह उनका राजा था। सिंह वही शेर-बबर, जिसके कंधों पर बाल होते हैं। ‘लायन’, जैसा कि तुम्हारी किताब की तस्वीर में है। जानवरों का राजा तो वही होगा न बेटे, जो खूब ताकतवर हो, खूंखार हो, जो दूसरों को मार सके, खा जाए ? सो यह सिंह भी वैसा ही होता है, सारे जानवरों में ताकतवर, इसीलिए जानवरों का राजा।

और बेटे, जैसे जानवरों का राजा सिंह होता है वैसे ही चिड़ियों का राजा मोर होता है। ‘पीकॉक’- खूब बड़ा, जिसके पंख बड़े-बड़े और अनेक रंगों के होते हैं। उसकी आवाज़ तो तुम जानते हो- पयो ! पयो ! वही मोर, जब बादल आसमान पर छा जाते हैं तब खूब प्रसन्न होकर, पंख फैलाकर अपने रंग-बिरंगे परों को गोल चक्कर, मंडल बनाकर, छाता बनाकर नाचने लगता है। मोर बहुत बड़ा भी होता है। ऐसा सुन्दर पक्षी चिड़ियों का राजा क्यों नहीं होगा ? सो मोर चिड़ियों का राजा था।

एक दिन सुबह का वक्त था। चिड़ियों का राजा मोर सोकर उठा था और जानवरों का राजा सिंह सोने जा रहा था। तुम जानते हो कि चिड़ियों का राजा दूसरी चिड़ियों की तरह रात में सोता है और दिन में काम करता है। ऐसे ही जानवरों का राजा सिंह भी दिन में सोता है और रात में शिकार करता है। रात को शिकार वह किसलिए करता है, बेटे, जानते हो ? इसलिए कि उसकी आँखें ऐसी बनी होती हैं कि रात में देख सके। दूसरे जानवर रात में नहीं देख पाते। पर सिंह, शेर और बिल्ली रात में भी देखते हैं। हां, बिल्ली भी, क्योंकि वह सिंह और शेर की मौसी होती है न। ऐसे ही चिड़ियों में उल्लू भी रात में देखता है।

सो उस दिन जब जानवरों का राजा सिंह और चिड़ियों का राजा मोर जंगल में मिले तब सुबह हो रही थी। मोर ने जुम्हाई ली और अपने पंख फैसा दिए, फिर सिंह की ओर शान से चला। सिंह भी थका होने से बार-बार जुम्हाई ले रहा था और अब सोने ही वाला था कि उसने देखा, रंग-बिरंगे पंखों का छाता ओढ़े मोर बड़ी मस्ती से चला आ रहा है। उसने अपनी पूछ पटकी और बैठे से उठकर, धीरे-धीरे गरजा-उ-आ ! ए-आ ! और मोर से पूछा- ‘‘कौन हो ? तुम कौन हो ?’’
मोर ने कहा- ‘‘बड़े गाबदू हो, भला इतना भी नहीं जानते कि मैं चिड़ियों का राजा मोर हूं। अच्छा बताओ भला, तुम कौन हो ?’’

सिंह ने कहा- ‘‘तुम्हारी इतनी हिम्मत की तुम मुझे गाबदू कहो ! खुद तुम इतने बोदे हो कि जंगल के राजा सिंह को भी नहीं पहचानते ! अच्छा, ठहरो !’’
यह कहकर सिंह उछलकर मोर की ओर बढ़ा। उधर मोर उड़कर पेड़ की डाली पर आ बैठा। उसने देखा कि सिंह मज़बूत होने के साथ ही बड़ा तेज़ और चौकन्ना भी है। बड़ा फुर्तीला है। उसके चंगुल से दूर ही रहना चाहिए। उधर सिंह ने भी देखा कि मोर उसकी पकड़ में नहीं आ सकता। वह पेड़ पर रहने वाला जीव है।
उसने पूछा- ‘‘पर जंगल में एक ही राजा होता है, सिंह, और वह सिंह मैं हूं। भला तू हम पर राज करेगा ? ज़रा, अपने कमज़ोर पैरों को तो देख !’’

इस पर मोर ज़रा लजा गया- क्योंकि जानते हो न क्षेम, उसके पैर बहुत पतले होते हैं। पर मोर हारा नहीं। उसने भी शेर को लजा दिया। बोला- ‘‘अरे चल, बड़ा राजा बनने चला है। ज़रा अपनी शक्ल तो देख। बिल्कुल सुअर की तरह मिट्टी लपेटे, गंदा सिर और कंधो पर बाल बढ़ाए, पंजों में नाखून बढ़ाए ! कैसा राजा कि नाई तक नहीं मिलता, कि बाल कटा ले ! तन पर वस्त्र तक तो तेरे हैं नहीं। राजा का तो छत्र होता है, भला कहां है तेरे छत्र ? दिखा तो ! मेरा देखता है कि नहीं ?’’ और मोर ने अपने पंखों का छत्र फैला दिया। उसके रंग-बिरंगे सुन्दर पंख और भी चमक उठे।
फिर तो दोनों में खूब बहस हुई कि दोनों में बड़ा कौन है। सिंह कहता कि मैं बड़ा हूं। मोर कहता है कि मैं बड़ा हूं। और उनकी बहस के शोर से आसपास के सारे जानवर पास आकर खड़े हो गए। सारे पक्षी आकर पेड़ों पर बैठ गए। जब उनका झगड़ा किसी तरह न निपटा तब चिड़ियों में चतुर उल्लू ने कहा कि ‘‘हे चिड़ियों के राजा मोर, और हे जानवरों के राजा शेर, तुम मेरी बात सुनो !’’

सारी चिड़ियाँ और सारे जानवर सुनने लगे। मोर और सिंह भी सुनने लगे। उल्लू बोला- ‘‘हे जानवरों के राजा सिंह, सात दिन तुम हम चिड़ियों के ऊपर राज करो, और चिड़ियों के राजा मोर, सात दिन तुम जानवरों पर राज करो। आज से सात दिन बाद हम सब जानवर और चिड़ियां फिर यहीं इकट्ठा होंगे और दोनों का राज देखकर हम बताएंगे कि सिंह का राज अच्छा है या मोर का, सिंह बड़ा है या मोर। जिसका राज अच्छा होगा, वही राजा बड़ा होगा।’’
उल्लू की बात सब ने मान ली, जानवरों ने भी, जानवरों के राजा सिंह ने भी, चिड़ियों ने भी, चिड़ियों के राजा मोर ने भी। फिर सब चुपचाप अपनी-अपनी राह चले गए। अगले दिन जानवरों के राजा सिंह चिड़ियों पर राज करने लगा और चिड़ियों का राजा मोर जानवरों पर।

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