लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :188
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6042
आईएसबीएन :9788170287285

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

57 पाठक हैं

प्रस्तुत है महात्मा गाँधी की आत्मकथा ....


वेस्टने जवाब दिया, 'यह तो आप जानते है कि मेरा अपना छापा-खाना हैं। बहुत संभव है कि मैं जाने को तैयार हो जाऊँ। आखिरी जवाब आज शाम तक दूँ तो चलेगा न?घूमने निकल सके तो उस समय हम बात कर लेंगे।'

मैं प्रसन्न हुआ। उसी दिन शाम को थोडी बातचीत की। वेस्ट को हर महीने दस पौंड और छापेखानेमें कुठ मुनाफा हो तो उसका अमुक भाग देने का निश्चय किया। वेस्ट वेतन के लिए तो आ नहीं रहे थे। इसलिए वेतन का सवाल उनके सामने नहीं था। दूसरे हीदिन रात की मेंल से वे डरबन के लिए रवाना हुए और अपनी उगाही का काम मुझे सौपते गये। उस दिन से लेकर मेरे दक्षिण अफ्रीका छोड़ने के दिन तक वे मेरेसुख-दुःख के साथी रहे। वेस्ट का जन्म विलायत के एक परगने के लाउथ नामक केएक किसान परिवार में हुआ था। उन्हें साधारण स्कूली शिक्षा प्राप्त हुई थी।वे अपने परिश्रम से अनुभव की पाठशाला में शिक्षा पाकर तैयार हुए शुद्ध,संयमी, ईश्वर से डरने वाले, साहसी और परोपकारी अंग्रेज थे। मैंने उन्हेंहमेशा इसी रुप में जाना हैं। उनका और उनके कुटुम्ब का परिचय इन प्रकरणों में हमे आगे अधिक होने वाला हैं।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book