लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :188
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6042
आईएसबीएन :9788170287285

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

57 पाठक हैं

प्रस्तुत है महात्मा गाँधी की आत्मकथा ....

पत्नी की दृढ़ता


कस्तूरबाई पररोग के तीन घातक हमले हुए और तीनों वह केवल घरेलू उपचार से बच गयी। उनमेंपहली घटना उस समय घटी जब सत्याग्रह का युद्ध चल रहा था। उसे बार बाररक्तस्राव हुआ करता था। एक डॉक्टर मित्र में शल्यक्रिया करा लेने की सलाह दी थी। थोडी आनाकानी के बाद पत्नी ने शल्यक्रिया कराना स्वीकार किया। उसकाशरीर बहुत क्षीण हो गया था। डॉक्टर ने बिना क्लोरोफार्म के शल्यक्रिया की।शल्यक्रिया के समय बहुत पीड़ा हो रही थी, पर जिस धीरज से कस्तूरबाई ने उसेसहन किया उससे मैं आश्चर्यचकित हो गया। शल्यक्रिया निर्विध्न पूरी हो गयी। डॉक्टर ने और उसकी पत्नी ने कस्तूरबाई की अच्छी सार-संभल की।

यह घटना डरबन में हुई थी। दो-तीन दिन के बाद डॉक्टर ने मुझे निश्चिन्त होकरजोहानिस्बर्ग जाने की अनुमति दे दी। मैं चला गया। कुछ ही दिन बाद खबर मिलीकि कस्तूरबाई का शरीर बिल्कुल सुधर नहीं रहा है और वह बिछौना छोड़करउठ-बैठ भी नहीं सकती। एक बार बेहोश भी हो चुकी थी। डॉक्टर जानते थे कि मुझसे पूछे बिना औषधि या अन्न के रूप ने कस्तूरबाई को शराब अथवा माँस नहींदिया जा सकता। डॉक्टर ने मुझे जोहानिस्बर्ग में टेलिफोन किया, 'मैं आपकीपत्नी को माँस का शोरवा अथवा बीफ-टी देने की जरूरत समझता हूँ। मुझे इजाजतमिलनी चाहिये। '

मैंने उत्तर दिया, 'मैं इजाजत नहीं दे सकता।किन्तु कस्तूरबाई स्वतंत्र है। उससे पूछने जैसी स्थिति हो ते पूछिये और वहलेना चाहे तो जरूर दीजिये।'

'ऐसे मामलों में मैं बीमार से कुछ पूछना पसंद नहीं करता। स्वय आपको यहाँ आना जरूरी है। यदि आप मैं जो चाहूँसो खिलाने की छूट मुझे न दे, तो मैं आपकी स्त्री के लिए जिम्मेदार नहीं।'

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book