लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :188
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6042
आईएसबीएन :9788170287285

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

57 पाठक हैं

प्रस्तुत है महात्मा गाँधी की आत्मकथा ....


मैंने मजदूरोको हडताल करने की सलाह दी। यह सलाह देने से पहले मैं मजदूरो और मजदूर नेताओं के सम्पर्क में अच्छी तरह आया। उन्हें हड़ताल की शर्ते समझायी :

1. किसी भी दशा में शांति भंग न होने दी जाय।

2. जो मजदूर काम पर जाना चाहे उसके साथ जोर जबरदस्ती न की जाय।

3. मजदूर भिक्षा का अन्न न खाये।

4. हडताल कितनी ही लम्बी क्यों न चले, वे ढृढ रहे और अपने पास पैसा न रहेतो दूसरी मजदूरी करके खाने योग्य कमा लें।

मजदूर नेताओं ने ये शर्तं समझ ली औऱ स्वीकार कर ली। मजदूरो की आम सभा हुई औऱउसमें उन्होंने निश्चय किया कि जब तक उनकी माँग मंजूर न की जाय अथवा उसकी योग्यता अयोग्यता की जाँच के लिए पंच की नियुक्ति न हो तब तक वे काम परनहीं जायेंगे।

कहना होगा कि इस हडताल के दौरान में मैं श्री वल्लभभाई पटेल और श्री शंकरलाल बैकर को यथार्थ रूप मैं पहचानने लगा। श्रीअनसूयाबाई का परिचय तो मुझे इसके पहले ही अच्छी तरह हो चुका था। हडतालियोंकी सभा रोज साबरमती नदी के किनारे एक पेड़ का छाया तले होने लगी। उसमें वेलोग सैकड़ो की तादाद में जमा होते थे। मैं उन्हें रोज प्रतिज्ञा का स्मरणकराता तथा शान्ति बनाये रखने और स्वाभिमान समझाता था। वे अपना 'एक टेक' काझंडा लेकर रोज शहर में घूमते थे और जुलूस के रूप में सभा में हाजिर होतेथे।

यह हडताल इक्कीस दिन तक चली। इस बीच समय समय पर मैं मालिको से बातचीत किया करता था और उन्हें इन्साफ करने के लिए मनाता था। मुझे यहजवाब मिलता, 'हमारी भी तो टेक है न? हममे और हमारे मजदूरो में बाप बेटे कासम्बन्ध हैं। उसके बीच में कोई दखल दे तो हम कैसे सहन करे? हमारे बीच पंचकैसे?'

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book