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भूतनाथ (सेट)

देवकीनन्दन खत्री

प्रकाशक : सरल प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :2177
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 7144
आईएसबीएन :000000000

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तिलिस्म और ऐयारी संसार की सबसे अधिक महत्वपूर्ण रचना

प्रश्न- पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्य एवं कार्यक्रमों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-
पूर्व शिक्षा का उद्देश्य
औपचारिक पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का मुख्य उद्देश्य 3 वर्ष से 6 वर्ष तक की आयु के बालकों को शारीरिक, मानसिक, सामाजिक तथा संवेगात्मक विकास के उपयुक्त अवसर प्रदान कना है। कोठारी आयोग (1964-66) के अनुसार पूर्व-प्राथमिक शिक्षा के उद्देश्य निम्नलिखित हैं -
(1) बालकों को स्वास्थ्यवर्द्धक वातावरण जैसे - खुली जगह, शुद्ध हवा, प्रकाश आदि उपलब्ध कराना, जिससे उनका शारीरिक अंग संचालन व पेशीय समन्व्य का विकास हो सके।
(2) बालकों में स्वास्थ्य सम्बन्धी अच्छी आदतें जैसे शौचालय जाना, स्नान करना, साफ रहना, भोजन करना आदि विकसित करना।
(3) बालकों में वाँछनीय सामाजिक दृष्टिकोण तथा आदतें विकसित करना जिससे वे समूह क्रियाओं में भाग ले सकें तथा अपने अधिकार व कर्तव्य के प्रति सजग रह सके।
(4) बालकों में अच्छी वस्तुओं व व्यक्तियों की प्रशंसा करने की आदत विकसित करना।
(5) बालकों में संवेगात्मक परिपक्वता विकसित करना जिससे वे अपने विचारों व संवेगों को समझने, स्वीकार करने, नियंत्रित करने तथा प्रदर्शित करने के योग्य बन सकें।
(6) बालकों में अपने वातावरण के सम्बन्ध में जिज्ञासा करने की प्रवृत्ति विकसित करना।
(7) बालकों में आत्म अभिरुचि क्षमता विकसित करना।
पूर्व-प्राथमिक शिक्षा का कार्यक्रम -
पूर्व-प्राथमिक शिक्षा केन्द्रों में बालक साधारणतः 3 से 6 घण्टे की अवधि तक रहते हैं। क्योंकि यह है, परन्तु पूर्व बेसिक स्कूलों में 212 वर्ष से लेकर 6 वर्ष तक आयु के युवा बालकों की शिक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की जाती है।

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    अनुक्रम

  1. प्रश्न 1

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