That Thing Called Love - Hindi book by - Tuhin A. Sinha - दैट थिंग कॉल्ड लव - तुहिन ए. सिन्हा
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दैट थिंग कॉल्ड लव

तुहिन ए. सिन्हा

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :183
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 7211
आईएसबीएन :978-81-288-2010

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मुम्बई की बारिश... और एक अनोखी प्रेम कथा...

That Thing Called Love - A Hindi Book - by Tuhin A Sinha

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

यह कहानी है एक पति की जो अपनी पत्नी को दिलो-जान से चाहता है अचानक उसकी बेवफाई से टूट जाता है, एक वफादार पति की जो उस पत्नी पर अपना प्यार बरसाना चाहता है जो अपने पहले प्यार को नहीं भूल पाई है। एक चुलबुली-सी रिसेप्शनिस्ट की जो वास्तव में एक कॉल गर्ल है, एक समलैंगिक पुरुष की जो हमेशा भोले-भाले पुरुषों को अपना निशाना बनाने के लिए आतुर रहता है।
वास्तव में ऐसे ही कुछ दिलचस्प पात्र मयंक सहाय के आस-पास हैं। 29 वर्षीय मयंक सहाय मैट्रीमोनियल वैबसाईट ‘द मैच मेकर डॉट कॉम’ में एड सेल्स मैनेजर हैं।

मयंक अपनी काल्पनिक दुनिया में बिना उम्मीद छोड़े अपने सपनों की रानी का इन्तजार कर रहा है। हालात तब अजीब मोड़ ले लेते हैं जब वह अपनी पसन्द को अपने सामने पाता है लेकिन उम्र में अपने से बड़ी और शादीशुदा स्त्री के रूप में। उसके सपनों को तब हकीकत के थपेड़ों का सामना करना पड़ता है जब उसे अपने और उस महिला के रिश्तों की जटिलता का आभास होता है।

रेवती और मयंक के रिश्तों की शुरुआत मुम्बई की बरसात के साथ हुई। मुम्बई में मयंक की पहली बरसात ने इस रिश्ते को और भी खास बना दिया।
क्या मयंक का यह रोमांस वास्तविकता और काल्पनिकता के बीच सामंजस्य स्थापित कर पाएगा ?
‘दैट थिंग कॉल्ड लव’ तुहिन का पहला उपन्यास है। यह मुम्बई जैसे मैट्रो शहर में जीवन के बदलते नैतिक मूल्यों के बीच रिश्तों की वास्तविकता से परिचित करवाता है।

दो शब्द


उदारीकरण के पश्चात् एक राष्ट्र के तौर पर हमारे अस्तित्व के हर क्षेत्र में आधारभूत परिवर्तन आए हैं। अधिकतर चीज़ें जो हम करते हैं वह भी सौदेबाजी की झलक देती हैं। व्यक्तिगत संबंध भी इस प्रभाव से अछूते नहीं है। इसलिए आज रिश्तों का यह विकास क्रम एक जटिल ताना-बाना है। यहाँ तक कि सही गलत में अंतर बताना भी विवाद खड़ा कर सकता है, इसके लिए भिन्न व्यक्तिगत विचारधाराओं को धन्यवाद...
यही कारण था कि प्रेम, रिश्तों और विवाह के विषय में लोगों के भिन्न विचारों को जानने की मेरी जिज्ञासा बढ़ती गई। ‘‘कहते हैं जिसे प्यार’’ इन्हीं असामान्य परिप्रेक्षों की एक यात्रा है।

यह पुस्तक है विकल्पों की और सहज दुविधाओं की। मनुष्य की हर अभिव्यक्ति जो नैतिकता के इर्द-गिर्द घूमती है वह हमेशा भावनाओं के तीव्र आवेग से उत्पन्न होती है। इस कहानी में भी यह आवेग पात्रों को उन अतिरिक्त चीज़ों को पाने के लिए प्रेरित करता है जिनकी कमी उन्हें अपनी प्रेम कहानी में महसूस होती है। यह तृष्णा उन्हें आजमाइश और संताप के रोचक पथ पर ले जाती है।
‘‘कहते हैं जिसे प्यार’’ मेरे प्रेम की कृति है। एक सामूहिक प्रयास होने के नाते टी.वी. और फिल्म में एक लेखक के तौर पर मेरा दायित्व सीमित है। परंतु उपन्यास में लगभग 62,000 शब्द जो मेरे हैं, यह सोच कर मुझे डर भी लगता है।
आशा है आप इसे पढ़ कर आनंद उठाएंगे !


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