|
कहानी संग्रह >> छाया मत छूना मन छाया मत छूना मनसुधा शुक्ला
|
233 पाठक हैं |
||||||
लेखिका का चिन्तन सतत् प्रवाहमान है। वह जगत में घटित होने वाले कार्य-व्यापारों पर सूक्ष्म दृष्टि रखती है। फिर उसे अपने चिंतन में किसी कथानक का रूप देकर अभिव्यक्त करती हैं
A PHP Error was encountered
Severity: Notice
Message: Undefined offset: -6
Filename: books/book_info.php
Line Number: 553
|
|||||
लोगों की राय
No reviews for this book







