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विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
अब मैं समझ रहा हूं कि मैं अब तक ऐसी बातें कहता रहा, जिन्हें समझने के लिए
अभी आप तैयार नहीं थे। मनश्चिकित्सा और मनोविश्लेषण की तुलना पेश करने के लिए
ही मैंने ऐसा किया, पर मैं यहां आपसे एक बात कहना चाहता हूं। क्या आपको इन
दोनों में कोई परस्पर विरोध जैसी चीज़ दिखाई दी? मनश्चिकित्सा मनोविश्लेषण के
प्राविधिक या टेक्नीकल तरीके प्रयोग में नहीं लाती, भ्रम की वस्तु पर बिलकुल
विचार नहीं करती, और आनुवंशिकता की बात कहकर हमें सिर्फ एक साधारण और
दूरवर्ती कारण बताती है; और पहले, अधिक वैज्ञानिक, और निकटतम कारण नहीं
बताती। पर क्या इसमें कोई परस्पर विरोध है? क्या एक चीज़ दूसरी की पूरक नहीं
है? क्या आनुवंशिकता वाली बात अनुभव के महत्त्व से मेल नहीं खाती और क्या वे
दोनों मिलकर बहुत प्रभावकारी नहीं बन जातीं? आप स्वीकार करेंगे कि
मनश्चिकित्सा के कार्य में कोई ऐसी सारभूत बात नहीं है जो मनोविश्लेषण
सम्बन्धी गवेषणाओं के विरुद्ध हो सके। इसलिए इसका विरोध करने वाले
मनश्चिकित्सक हैं, मनश्चिकित्सा नहीं। मनोविश्लेषण और मनश्चिकित्सा का बहुत
कुछ वैसा ही सम्बन्ध है जैसा औतिकी2 तथा शरीर का-एक में अंगों के बाहरी रूपों
का अध्ययन होता है और दूसरे में ऊतकों3 का और घटक तत्त्वों से इनके निर्माण
का। इन दोनों अध्ययनक्षेत्रों में, जिनमें एक का काम दूसरे में चालू रखा जाता
है, कोई परस्पर विरोध आसानी से नहीं सोचा जा सकता। आप जानते हैं कि आजकल
चिकित्सा के वैज्ञानिक अध्ययन का आधार शरीर है, पर किसी समय शरीर की भीतरी
संरचना4 देखने के लिए मनुष्य के शवों की चीर-फाड़ करना उतना ही बुरा और
निषिद्ध माना जाता था, जितना कि आजकल मनुष्य के मन की भीतरी कार्य-पद्धति
देखने के लिए मनोविश्लेषण को माना जाता है। और शायद कुछ ही समय बाद हम यह देख
लेंगे कि वैज्ञानिक आधार पर मनश्चिकित्सा तब तक न हो सकेगी, जब तक मानसिक
जीवन की गहराई में हो रहे अचेतन प्रक्रमों का पूरा-पूरा ज्ञान न हो।
आपमें से कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं जो मनोविश्लेषण से काफी प्रीति रखते हों,
हालांकि प्रायः इसकी आलोचना की जाती है; और यह कामना रखते हों कि यह
अपने-आपको एक और दिशा में, अर्थात् चिकित्सा के क्षेत्र में भी उचित सिद्ध कर
देगा। आप जानते हैं कि मनश्चिकित्सा पद्धति अब तक भ्रमों पर असर डालने में
असमर्थ रही है। क्या मनोविश्लेषण, शायद इन लक्षणों के तन्त्र के भीतरी रूप को
जानने के कारण, उन पर असर डाल सकता है? नहीं; मुझे आपसे यही कहना है कि यह उन
पर असर नहीं डाल सकता, क्योंकि कम-से-कम इस समय तो यह इन
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1. देखिए Totem and Tabu
2. Histology
3. Tissues
4. Structure
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