|
विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
|
286 पाठक हैं |
||||||
‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
ऊपर प्रस्तुत की गई तुलनाओं से पता चला कि 'प्रतिगमन' शब्द का प्रयोग अब तक
उसके सामान्य अर्थ में नहीं किया जा रहा था, बल्कि एक संकुचित अर्थ में किया
जा रहा था। अगर आप इसका व्यापक अर्थ-अर्थात् साधारणतया परिवर्धन की ऊंची
अवस्था से नीची अवस्था में लौट आना-लें, तब दमन भी प्रतिगमन के अन्तर्गत आ
जाता है, क्योंकि यह भी कहा जा सकता है किसी मानसिक कार्य का, परिवर्धन की
पहले वाली और निचली मंजिल पर प्रतिवर्तन, अर्थात् लौट आना, भी दमन है। फर्क
सिर्फ इतना है कि दमन में इस प्रतिगमन की दिशा का हमारे लिए कोई महत्त्व नहीं
है, क्योंकि हम इसे गतिकीय अर्थ में उस समय दमन भी कहते हैं, जब कोई मानसिक
प्रक्रम निचली अचेतन अवस्था से चलने से पहले रोक दिया जाता है। इस प्रकार दमन
एक स्थानवत्तीय गतिकीय अवधारण है जबकि प्रतिगमन शद्ध रूप से वर्णनात्मक
अवधारण है। पर अब तक जिस चीज़ को हमने 'प्रतिगमन' कहा है और बद्धता के साथ
जिसके सम्बन्ध पर विचार किया है वह परिवर्धन में अपने पहले वाले पड़ावों पर
राग या लिबिडो की वापसी को ही सूचित करता था, अर्थात् ऐसी चीज़ को सूचित करता
था जो सारतः दमन से बिलकुल भिन्न और उससे बिलकुल स्वतन्त्र है। राग के
प्रतिगमन को हम शुद्ध रूप से मनोधात्वीय प्रक्रम भी नहीं कह सकते; न हम यह
जानते हैं कि मानसिक उपकरण में इसका स्थान कहां निर्दिष्ट करें, क्योंकि
यद्यपि यह मानसिक जीवन पर बड़ा प्रबल प्रभाव डाल सकता है, तो भी इसमें
मस्तिष्क-क्षेत्रीय1 कारक सबसे अधिक प्रमुख होता है।
इस तरह का विचार कुछ शुष्क-सा हो जाता है। इसलिए उसकी अधिक सजीव धारणा
प्राप्त करने के लिए उसके कुछ रोग-सम्बन्धी दृष्टान्त लिए जाएं। आप जानते हैं
कि स्थानान्तरण स्नायु-रोगों के समूह में मुख्यतः हिस्टीरिया और
मनोग्रस्तता-रोग आते हैं। हिस्टीरिया में राग का प्राथमिक निषिद्ध
सम्भोगात्मक यौन आलम्बनों पर प्रतिगमन तो निस्सन्देह सदा मिलता है, पर यौन
संगठन की इससे पहली वाली मंज़िल पर इसका प्रतिगमन नहीं होता, या बहुत ही
थोड़ा होता है। परिणामतः हिस्टीरिया के तन्त्र में मुख्य कार्य दमन द्वारा
किया जाता है। अब तब इस स्नायु-रोग की जो निश्चित जानकारी मिल चुकी है, उसके
आधार पर स्थिति इस तरह बयान की जा सकती है : जननेन्द्रिय क्षेत्र की प्रधानता
में घटक-आवेगों का सायुज्यन2 (अर्थात् मिलकर बिलकुल एक बन जाना) हो चुका है;
पर इस ऐक्य के परिणामों का पूर्वचेतन संस्थान की, जिसके साथ चेतना जुड़ी हुई
है, दिशा से प्रतिरोध होता है। इसलिए जननेन्द्रिय संगठन अचेतन के लिए तो ठीक
बैठता है, पर पूर्व-चेतन के लिए नहीं और पूर्व-चेतन द्वारा इस अस्वीकृति के
परिणामस्वरूप ऐसा चित्र बनता है जो जननेन्द्रिय क्षेत्र की प्रधानता से पहले
वाली स्थिति से कुछ मिलता-जुलता है; पर असल में, यह बिलकुल भिन्न होता है।
राग के दो प्रकार के प्रतिगमनों में से, जो प्रतिगमन यौन संगठन की पहले वाली
कला पर होता है, वह अधिक महत्त्वपूर्ण होता है। क्योंकि हिस्टीरिया में यह
प्रतिगमन नहीं होता, और अभी हमारा स्नायु-रोगों का सारा अवधारण मुख्यतः
हिस्टीरिया के अध्ययन के द्वारा ही चल रहा है, जो समय की दृष्टि से पहले हुआ
था; इसलिए राग-प्रतिगमन का महत्त्व दमन के महत्त्व से बहुत पीछे समझा जा सका।
मुझे निश्चय है कि जब हम हिस्टीरिया और मनोग्रस्तता-रोग के अलावा अन्त
स्वरतिक स्नायु-रोगों पर भी विचार करेंगे, तब हमारे दृष्टिकोण और अधिक
विस्तृत और परिवर्तित हो जाएंगे।
-------------------
1. Organic factor
2. Fusion
|
|||||








