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उपासना एवं आरती >> सचित्र स्तुति संग्रह

सचित्र स्तुति संग्रह

गीताप्रेस

प्रकाशक : गीताप्रेस गोरखपुर प्रकाशित वर्ष : 2006
पृष्ठ :19
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 918
आईएसबीएन :81-293-0291-8

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प्रस्तुत है सचित्र स्तुति संग्रह....

Sachitra Stuti Sangrah a hindi book by Gitapress -सचित्र स्तुति संग्रह - गीताप्रेस

प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश

यस्यांके च विभूति भूधरसुता देवापगा मस्तके
भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्।
सोऽयं भूतिविभूषण: सुरवर: सर्वाधिप: सर्वदा
शर्व: सर्वगत: शिव: शशिनिभ: श्रीशंकरः पातु माम्।।


श्रीगणेश



गजाननं भूतगणादिसेवितं
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं
नमामि विग्नेश्वरपादपंकजम्।।


श्रीसूर्य



प्रातर्भजामि सवितारमनन्तशक्तिं
पापौघशत्रुभयरोगहरं परं च।
तं सर्वलोककलनात्मककालमूर्तिं
गोकण्ठबन्धनविमोचनमादिदेवम्।।

श्रीविष्णु


सशङखचक्रं सकिरीटकुण्डलं
सपीतवस्त्रं सरसीरुहेक्षणम्।
सहारवक्ष:स्थलकौस्तिभश्रियं
नमामि विष्णुं शिरसा चतुर्भुजम्।।


श्रीलक्ष्मीनारायण



शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभांग्ङम्।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यं
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलौकेकनाथम्।।


श्रीगंगाधर शिव


कर्पूरगौरं करुणावतारं
संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा वसन्तं हृदयारविन्द्
भवं भवानीसहितं नमामि।

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