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चढ़ान  : स्त्री० [हिं० चढ़ना] १. चढ़ने की क्रिया या भाव। २. ऐसा स्थान जो बराबर ऊपर की ओर उठता या चढ़ता चला गया हो। जैसे–पहाड़ की चढ़ान।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
चढ़ाना  : स० [हिं० चढ़ना] १. किसी को चढने में अर्थात् ऊपर की ओर जाने में प्रवृत्त करना। २. उठाकर किसी चीज को ऊँचाई पर ले जाना। ३. यान, सवारी आदि पर किसी को बैठाना। जैसे–लड़के को घोड़ी पर (विवाह के समय) चढ़ाना। ४. किसी प्रकार के क्रमिक विकास में ऊपर की ओर अग्रसर करना या बढ़ाना। ५. किसी चीज का मान, मूल्य आदि बढ़ाना। मुहावरा–सिर पर चढ़ना (दे०)। ६. श्रद्धापूर्वक कोई चीज समर्पित करना। जैसे–भगवान को फल चढ़ाना। ७. कोई ऐसी क्रिया करना जिससे कोई चीज उच्च स्तर पर पहुँचे। जैसे–(क) आस्तीन चढ़ाना। (ख) गुड्डी या पतंग चढ़ाना। ८. कोई चीज या आवरण किसी चीज पर रखना या पहनाना। जैसे–(क) चूल्हें पर कड़ाही चढ़ाना। (ख) तकिये पर खोली चढ़ाना। ९. लेप आदि पोतना या लगाना। जैसे–दीवारों पर रंग चढ़ाना। १॰. कोई क्रिया, मनोवेग या व्यापार तीव्र करना। जैसे–किसी को गुस्सा चढ़ाना। ११. बही खाते आदि पर कोई आय या व्यय की मद लिखना। १२. अपने ऊपर या सिर पर लेना। जैसे–कर्ज चढ़ाना।
समानार्थी शब्द-  उपलब्ध नहीं
 
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