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शब्द का अर्थ
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चरस :
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स्त्री० [सं० चर्य या रस] १. गाँजे के पौधों के डंठलों पर से उतारा हुआ एक प्रकार का हरा या हलका पीला गोंद या चेप जो प्रायः मोम की तरह का होता है और जिसे लोग गाँजे या तमाकू की तरह पीते हैं। नशे में यह प्रायः गाँजे के समान ही होता है। पुं० [फा० चर्ज] आसाम में अधिकता से होनेवाला एक प्रकार का पक्षी जिसका मांस बहुत स्वादिष्ट होता है। इसे वनमोर या चीनी-मोर भी कहते हैं। पुं० दे० ‘चरसा’।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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समानार्थी शब्द-
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चरसा :
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पुं० [सं० चर्म्म] १. भैंस, या बैल आदि के चमड़े का बना हुआ वह वबड़ा थैला जिसकी सहायता से खेत सींचने के लिए कुएँ से पानी निकाला जाता है। पुर। मोट। २. चमड़े का बना हुआ कोई बड़ा थैला। ३. जमीन की एक नाप जो प्रायः २॰॰॰ हाथ लंबी और इतनी ही चौड़ी होती थी। गो-चर्म। पुं० चरस (पक्षी)।(यह शब्द केवल स्थानिक रूप में प्रयुक्त हुआ है) |
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चरसिया :
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पुं० =चरसी (चरस पीनेवाला)। |
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चरसी :
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पुं० [हिं० चरस+ई (प्रत्यय)] १. वह जो चरस की सहायता से कूएँ से पानी निकालकर खेत सींचता हो। मोट खींचनेवाला। २. वह जो गाँजे, तमाकू आदि की तरह चरस पीता हो। |
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