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चिड़िया :
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स्त्री० [सं० चटिका, प्रा० चड़िआ या सं० चिरि=तोता] १. वह जीव जो पंखों या परों की सहायता से आकाश में उड़ता है। पक्षी। मुहावरा–चिड़िया के छिनाले में पकड़ा जाना=अकारण झंझट में पड़ना या फँसना। २. गोरैया। पद–चिड़िया का दूध=ऐसी चीज जो वास्तव में उसी प्रकार न होती हो, जिस प्रकार चिड़ियों का दूध नहीं होता। चिड़िया-नोचन=ऐसी स्थिति जिसमें चारों ओर से लोग उसी प्रकार तंग या परेशान करते हों, जैसे–चिड़िया के पर नोचे जाते हैं। ३. ऐसा मालदार असामी जिससे कुछ धन ऐंठा या ठगा जा सकता हो। ४. कोई युवती और सुन्दर परन्तु कुछ दुशचरित्रा स्त्री। (बाजारू)। पद–सोने की चिड़िया (क) बहुत बड़ा और मालदार असामी। (ख) बहुत रूपवती और सुंदर स्त्री। ५. काठ का वह डंडा जिसके दोनों ओर निकला हुआ कुछ लंबोतरा अंश होता है और जो किसी चीज के नीचे बैसाखी की तरह टेक या सहारे के लिए लगाया जाता है। जैसे–डोली या पालकी रोकने के समय डंडों के नीचे लगाई जानेवाली चिड़िया। ६. उक्त आकार का लोहे का वह टुकड़ा जो तराजू की डाँड़ी के ऊपर और नीचे लगा रहता है। ७. अँगिया, कुरती आदि में लगे हुए वे गोलाकार टुकड़े जिनमें स्त्रियों के स्तन रहते हैं। कटोरी। ८. पायजामें, लहँगे आदि का वह ऊपरी नलाकार अंश जिसमें इजारबंद या नाला डाला जाता है। नेफा। ९. ताश के चार रंगों में एक रंग जो काला और प्रायः पक्षी के आकार का होता है। चिड़ी। (शेष तीन रंग हुकुम, पान, और ईट कहलाते हैं।) १॰. एक प्रकार की सिलाई जिसमें पहले कपड़े के दोनों पल्ले सीकर तब सिलाई की ओर वाले उनके दोनों सिरों को अलग-अलग उन्हीं पल्लों पर उलट कर इस प्राकार बखिया कर देते हैं कि एक प्रकार की बेल-सी बन जाती है। |
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चिड़िया-घर :
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पुं० [हिं० पद] वह स्थान जहाँ अनेक प्रकार के पशु-पक्षी आदि जन-साधारण को प्रदर्शित करने के लिए एकत्र करके रखे जाते हैं। चिड़िया-खाना। (जू)। |
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चिड़िया-चुनमुन :
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पुं० [हिं० चिड़िया+अनु०] चिड़िया और उनकी तरह के दूसरे छोटे जीव-जंतु। |
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चिड़ियाखाना :
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पुं०=चिड़िया-घर। |
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