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रहस्य-रोमांच >> घर का भेदी घर का भेदीसुरेन्द्र मोहन पाठक
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अखबार वाला या ब्लैकमेलर?
"मैडम, यकीन जानिये, सूरी आज ही शाम तक बरी हो जायेगा।"
"असल कातिल की गिरफ्तारी के बिना ही?"
"वो भी पकड़ा जायेगा। इन्स्पेक्टर चानना जब जहां से रुखसत होगा तो वो कातिल
को अपने साथ लेकर जायेगा।
आइये।"
तत्काल वो सुनील के साथ हो ली।
इन्स्पेक्टर चानना ने गौर से हर बात सुनी।
"अब ये स्पष्ट है" --आखिर में सुनील बोला-"कि सूरी के - पास बतरा के कत्ल का
कोई उद्देश्य नहीं था। बतरा की दौलत हथियाने के लिये वो उसकी विधवा से शादी
नहीं कर सकता था क्योंकि वो पहले से शादीशुदा था। अब आपके पास उसको रिहा कर
देने के अलावा और कोई चारा नहीं है।"
"तो फिर कत्ल किसने किया?"-चानना भुनभुनाया।
"उस शख्स ने किया जो कि अपनी जुवानी कुबूल करता है कि कत्ल के वक्त के दौरान
वो यहां मौजूद था। जिसको वहां बेरोकटोक आवाजाही की सुविधा उपलब्ध है और जो
कोठी की बेसमेन्ट से लेकर टॉप फ्लोर तक हवा के झोंके की तरह निर्बाध फिर सकता
है। जिसके पास मकतूल के करम से कोठी के पिछले प्रवेशद्वार की चाबी तक उपलब्ध
है। जिसको खिड़की की चिटकनी कमजोर करने की सुविधा थी, मर्डर वैपन चुराने की -
सुविधा थी, कत्ल करने की सुविधा थी, मौकायवारदात पर मौजूद होने की वजह से
जिसने संजीव सूरी को पिछवाड़े के रास्ते यहां से खिसकते देखा था, जिसके पास
कत्ल का दोहरा उद्देश्य था और जिसने अपनी जुबानी मुझे ये आइडिया दिया था कि
मकतूल उसके रास्ते का पत्थर था।"
"किसने?"
"मैं कुछ कहना चाहता हूं।"--एकाएक मजूमदार बोला।
"क्या कहना चाहते हैं आप?" -सुनील बोला।
"तुम्हारे साथ रेडियो स्टेशन पर हुई बातों से मेरे मन में ये शक जागा था कि
शायद वारदात की रात को मुझे फोन करने वाला शख्स संजीव सूरी नहीं था। अब मैं
गारंटी के साथ कह सकता हूं कि वो संजीव सूरी नहीं था।"
"तो कौन था?"
तत्काल मजूमदार ने लेखक सागर संतोषी की तरफ उंगली उठा दी।
"जिस शख्स ने मुझे फोन किया था"-वो बोला- “उसके बोलने का तरीका ऐसा था कि हर
फिकरा बोलने के बाद वो खामोश हो जाता था। इसी वजह से फोन पर मुझे कई बार ऐसा
लगा था जैसे लाइन कट गई थी लेकिन ऐसा नहीं था। फोन करने वाले के बोले हर दो
फिकरों के बीच की खामोशी की वजह से मुझे वो वहम होता था कि शायद लाइन कट गई
थी। मैं अभी दस मिनट तक सागर संतोषी साहब से बात करता रहा था। इनका
अन्दाजेबयां ऐन वैसा है जैसा कि मुझे फोन करने वाले का । था। अब मैं यकीन के
साथ कह सकता हूं कि खुद को संजीव सूरी बताकर इन्होंने मुझे फोन किया था।"
लेखक हंसा।
"इनके बंगले पर"-अर्जुन बोला- “स्पोर्टस शूज़ का एक जोड़ा मौजूद है जिसके एक
पांव के तले में शरबती रंग के कांच का टुकड़ा पैवस्त है।"
“वैरी गुड।"-सुनील बोला।
"टेलीफोन काल का क्या किस्सा है?" चानना ने पूछा "जूतों का क्या किस्सा है?"
सुनील ने बताया। चानना ने नई दिलचस्पी के साथ लेखक की तरफ देखा। लेखक ने
लापरवाही से कन्धे उचकाए और फिर हंसा।
“कत्ल के"-चानना सुनील से सम्बोधित हुआ- "दोहरे उद्देश्य से तुम्हारा क्या
मतलब है?"
"सुनिए। एक तो ये भावना के दीवाने हैं। अपनी जुबानी कुबूल करते हैं कि भावना
के करीब बने रहने की खातिर ये उस भूत बंगले में रहते हैं वरना ये ऊंटी जाकर
रह सकते हैं, स्विट्जरलैण्ड जाकर रह सकते हैं। भावना के लिए इनका
इजहारेमुहब्बत मैं अपने कानों से सुन चुका हूं और आंखों से देख चुका हूं।"
"खूबसूरत औरत की ख्वाहिश किसी के भी मन में पैदा हो सकती है।"--लेखक सुसंयत
स्वर में बोला-"खासतौर से मेरे जैसे तनहा, उम्रदराज और खयालों की दुनिया में
विचरने वाले शख्स के मन में।....खासतौर से जब कि औरत भावना हो जो कि खूबसूरत
ही नहीं, परीचेहरा है, तोबाशिकन हुस्न की मलिका है।"
"लेकिन गैर की बीवी है। इसलिये आपने गैर का पुलन्दा बांध दिया।"
“मैंने ऐसा कुछ नहीं किया।"
"आपने बराबर किया। इसलिये नहीं तो इसलिये किया कि बतरा आपको ब्लैकमेल कर रहा
था।"
"मुझे? किस बिना पर?"
"आपके फर्जी लेखक होने की बिना पर। आप इतने बड़े लेखक मान जाते हैं लेकिन
आपके सारे प्रसिद्ध उपन्यास किसी दूसरे शख्स ने लिखे हैं और वो आपके नाम से
छपे हैं। आप के नाम से कोई घोस्ट राईटिंग करता था, इस बात पर किसी को शक था,
तो कोई यकीनी तौर पर जानता था लेकिन सबूत किसी के पास नहीं था। सबूत सिर्फ
बतरा के हाथ लगा था जिसकी बिना पर कि वो आपको ब्लैकमेल कर रहा था क्योंकि इस
बात का आम हो जाना बतौर लेखक आपको बर्बाद कर सकता था। कत्ल से अगले रोज बतरा
के बैडरूम में आप वो सबूत ही तलाश कर रहे थे जबकि ऊपर से मैं और भावना वहां
पहुंच गये थे और आपने बड़े इतमीनान से कह दिया था कि आप अपने पुराने नावल
‘अहसान-फरामोश' की बतरा को दी कापी तलाश कर रहे थे। नम्वर दो, हर कोई कहता है
कि बतरा की माली खुशहाली की वजह वो सपरहिट फिल्म 'खुन खिलाड़ी का' थी जिसकी
एवज में उसे लाखों रुपये मिले थे और जिसकी बाबत आप कहते हैं कि आपने वो फिल्म
लिखने में बतरा की मदद की थी। मेरी तफ्तीश कहती है कि इस मद में बतरा को मिली
रकम सिर्फ हजारों में थी! मेरा दावा है कि वो लाखों वाली रकम आप डकार गए थे
क्योंकि फिल्मी दुनिया में पहुंच बनाने के लिए दरकार कान्टैक्ट आपके थे। जरूर
बतरा उस रकम में हिस्सा बंटाने के लिए भी आप पर जोर डाल रहा था। जबकि आप न
ब्लैकमेल चुकाना चाहते थे और न उस रकम में हिस्सा बंटाना चाहते थे। तब आपको
बतरा का कत्ल करना सूझा। यूं आप.एक तीर से दो शिकार करते। भावना आजाद हो जाती
और आप लाखों की रकम से महरूम होने से बच जाते। बतरा की स्टडी से उसकी एक
"रिवॉल्वर” चुरा लेना आप के लिए मामूली काम था। जिम में कसरत करते होने के
बहाने आप पार्टी के रोज बतरा की आमद से पहले यहां मौजूद रह सकते थे। पिछवाड़े
के प्रवेशद्वार की चाबी पास होने की वजह से आपको आमद के मामले में किसी से
पूछने की भी जरूरत नहीं थी। लिहाजा बतरा यहां पहुंचा, आप नीचे जिम से निकल कर
चुपचाप पिछवाड़े में पहुंचे जहां ड्राइंगरूम की खुली खिड़की में से आपने बतरा
को शूट कर दिया। वहीं एक बियर की टूटी बोतल के टुकड़े बिखरे हुए थे जिसमें से
एक आपके उन जूतों के एक पांव में पैवस्त हो गया जो कि आप उस रात पहने हुए थे।
मंगलवार दोपहरबाद जब मैं आपसे ऊपर बतरा के बैडरूम में मिला था तो आपने अपनी
जुबानी कुबूल किया था कि यहां एक्सरसाइज के लिए ट्रैक सूट और स्पोर्ट्स शूज़
पहनकर आते थे। लिहाजा कत्ल की रात को भी जब आप जिम में मौजूद थे तो जरूर अपने
स्पोर्ट्स शूज़ पहने रहे होंगे। बतरा के कत्ल के बाद से आज तक आप फिर कभी जिम
गये हैं?"
“नहीं।"
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