प्राणों में घुले हुए रंग - फणीश्वरनाथ रेणु Pranon Mein Ghule Hue Rang - Hindi book by - Phanishwarnath Renu
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प्राणों में घुले हुए रंग

फणीश्वरनाथ रेणु

प्रकाशक : वाणी प्रकाशन प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :232
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 14465
आईएसबीएन :9789387889941

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प्राणों में घुले हुए रंग

इस संग्रह में रेणु की इतनी विधाओं में लिखी गयी रचनाओं को एक साथ प्रकाशित करने का उद्देश्य यह है कि इस संग्रह के द्वारा पाठकों को रेणु की ‘बहुमुखी प्रतिभा’ से परिचय एवं उनकी अप्रकाशित-असंकलित यानी अप्राप्य रचनाओं से पाठकों का साक्षात्कार एक ही साथ हो। कहानी, रिपोर्ताज़, नाटक, संस्मरण, निबन्ध, पत्र और पटकथा-ये सात विधाएँ सात रंग की तरह हैं, जो एक-दूसरे से अलग होते हुए भी अभिन्न हैं। इन सभी के द्वारा रेणु के प्राणों में घुले हुए सभी रंग एवं भाव प्रकट हुए हैं। कुछ रंग उदास, मटमैले हैं, तो कुछ चटक, कुछ पीले तो कुछ टह-टह लाल, कहीं-कहीं सफेद रंग दूर तक फैला दिखाई देता है, तो कभी अँधेरे की तरह काला रंग मन में घर करने लगता है।

…रेणु की ये रचनाएँ जीवन के एक-एक भाव को, एक-एक रंग को…यानी कि जीवन को समग्रता के साथ देखती, परखती और प्रस्तुत करती हैं। रेणु के लिए कोई भी रंग ख़राब नहीं है, वे एक ऐसे बड़े चित्रकार हैं, जो हर रंग से अपने भावात्मक तादात्म्य को स्थापित करता है।

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