लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : डायमंड पॉकेट बुक्स प्रकाशित वर्ष : 2009
पृष्ठ :390
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 1530
आईएसबीएन :9788128812453

Like this Hindi book 3 पाठकों को प्रिय

160 पाठक हैं

my experiment with truth का हिन्दी रूपान्तरण (अनुवादक - महाबीरप्रसाद पोद्दार)...


इन बुनकरोको आश्रम की तरफ से यह गारंटी देनी पड़ी थी कि देशी सूत का बुना हुआ कपड़ा खरीद लिया जायेगा। इस प्रकार विशेष रूप से तैयार कराया हुआ कपड़ा बुनवाकरहमने पहना और मित्रों में उसका प्रचार किया। यों हम कातनेवाली मिलो के अवैतनिक एजेंट बने। मिलो के सम्पर्क में आने पर उनकी व्यवस्था की और उनकीलाचारी की जानकारी हमे मिली। हमने देखा कि मिलो का ध्येय खुद कातकर खुद ही बुनना था। वे हाथ-करधे की सहायता स्वेच्छा से नहीं, बल्कि अनिच्छा से करतीथा।

यह सब देखकर हम हाथ से कातने के लिए अधीर हो उठे। हमने देखाकि जब तक हाथ से कातेगे नहीं, तब तक हमारी पराधीनता बनी रहेगी। मिलो केएजेंट बनकर देशसेवा करते है, ऐसा हमे प्रतीत नहीं हुआ।

लेकिन न तो कही चरखा मिलता था और न कही चरखे का चलाने वाला मिलता था। कुकड़ियाँआदि भरने के चरखे तो हमारे पास थे, पर उन पर काता जा सकता है इसका तो हमे ख्याल ही नहीं था। एक बार कालीदास वकील एक वकील एक बहन को खोजकर लाये।उन्होंने कहा कि यह बहन सूत कातकर दिखायेगी। उसके पास एक आश्रमवासी को भेजा, जो इस विषय में कुछ बता सकता था, मैं पूछताछ किया करता था। पर कातनेका इजारा तो स्त्री का ही था। अतएव ओने-कोने में पड़ा हुई कातना जाननेवाली स्त्री तो किसी स्त्री को ही मिल सकती थी।

सन् 1917 में मेरेगुजराती मित्र मुझे भड़ोच शिक्षा परिषद में घसीट ले गये थे। वहाँ महा साहसी विधवा बहन गंगाबाई मुझे मिली। वे पढी-लिखी अधिक नहीं थी, पर उनमेंहिम्मत और समझदारी साधारणतया जितनी शिक्षित बहनो में होती है उससे अधिक थी। उन्होंने अपने जीवन में अस्पृश्यता की जड़ काट डाली थी, वे बेधड़कअंत्यजों में मिलती थी और उनकी सेवा करती थी। उनके पास पैसा था, पर उनकी अपनी आवश्यकताये बहुत कम थी। उनका शरीर कसा हुआ था। और चाहे जहाँ अकेलेजाने में उन्हें जरा भी झिझक नहीं होती थी। वे घोड़े की सवारी के लिए भी तैयार रहती थी। इन बहन का विशेष परिचय गोधरा की परिषद में प्राप्त हुआ।अपना दुख मैंने उनके सामने रखा और दमयंती जिस प्रकार नल की खोज में भटकी थी, उसी प्रकार चरखे की खोज में भटकने की प्रतिज्ञा करके उन्होंने मेराबोझ हलका कर दिया।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book