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ताजमहल मन्दिर भवन है

पुरुषोत्तम नागेश ओक

प्रकाशक : हिन्दी साहित्य सदन प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :270
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 15322
आईएसबीएन :9788188388714

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पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...


ताजमहल के प्रत्येक विवरण को जालसाजी सिद्ध करनेवाली न्यूनताओं एवं असंगतियों का एक अन्य उदाहरण नकली कब्रों के चारों ओर बनी संगमरमर की जालियों से सम्बन्धित है। इनके सम्बन्ध में कीन की हैंडबुक के पृष्ठ १७१ में लिखा है-"कब्रों के कक्ष के केन्द्रीय भाग को अष्टकोणीय क्षेत्र में घेरनेवाली संगमरमर की जालियाँ, बादशाहनामे के अनुसार शाहजहाँ द्वारा १६४२ में यहाँ स्थापित की गई थीं"किन्तु विषय के आधिकारिक विद्वानों के कथनानुसार ये जालियाँ यहाँ पर औरंगजेब द्वारा अपने पिता के अवशेष दफनाने के बाद लगाई गई हैं।

यह उद्धरण सूक्ष्म परीक्षण चाहता है। यह ध्यान देने योग्य है कि स्वयं बादशाह के आदेश पर लिखे गए बादशाहनामे के विवरण को कीन विश्वसनीय नहीं मानता, क्योंकि उसने अन्य अधिकारी विद्वानों की मान्यताओं को अधिक उचित माना है। जहाँ तक कीन का बादशाहनामे पर विश्वास न करना है, वह उचित है, क्योंकि जैसे कि हमने तथा अन्य इतिहास के विवेकशील अनेक अध्येताओं ने बार-बार इस बात पर बल दिया है कि मध्यकालीन मुस्लिम इतिहास तो, बादशाह की कृपादृष्टि प्राप्त करने के उद्देश्य से, चाटुकारिता से भरपूर है। किन्तु वहाँ पर गलत है जहाँ वह अन्य अधिकारी विद्वानों को विश्वसनीय बताता है। चाटुकार तो, वे फिर शाहजहाँ के दरबार में हों अथवा औरंगजेब के, सब एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। एकमात्र सम्भावित निष्कर्ष जो हम निकाल सकते हैं वह यह है कि ताजमहल के राजपूत स्वामियों के मयूर-सिंहासन को वे संगमरमर की जालियाँ आरम्भ से ही घेरे हुए वहाँ पर विद्यमान थीं। औरंगजेब ऐसा व्यक्ति नहीं था जो कि अपने उस पिता का, जिससे वह घृणा करता था, मकबरा सजाने में एक पैसा भी व्यय करे।

स्लीमन* कहता है कि महारानी के मकबरे पर खुदी कुरान की आयत इन शब्दों के साथ समाप्त होती है-"और हमारी विश्वास न करनेवालों की जाति से रक्षा करो।" ऐसा समाप्तीकरण महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि लक्ष्य यही सिद्ध करना है कि ताजमहल को एक 'विश्वास न करनेवाले' परिवार से इसलिए छीना गया था कि उस जाति को समाप्त किया जा सके। मुमताज़ के मकबरे पर उद्धृत किए जानेवाले उद्धरण का चयन इस उद्देश्य के साथ विश्वासघात करता है।
* "बल्स एण्ड रिफलेक्शन्स ऑफ एन इंडियन औफिशियल'. पृष्ठ २४

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    अनुक्रम

  1. प्राक्कथन
  2. पूर्ववृत्त के पुनर्परीक्षण की आवश्यकता
  3. शाहजहाँ के बादशाहनामे को स्वीकारोक्ति
  4. टैवर्नियर का साक्ष्य
  5. औरंगजेब का पत्र तथा सद्य:सम्पन्न उत्खनन
  6. पीटर मुण्डी का साक्ष्य
  7. शाहजहाँ-सम्बन्धी गल्पों का ताजा उदाहरण
  8. एक अन्य भ्रान्त विवरण
  9. विश्व ज्ञान-कोश के उदाहरण
  10. बादशाहनामे का विवेचन
  11. ताजमहल की निर्माण-अवधि
  12. ताजमहल की लागत
  13. ताजमहल के आकार-प्रकार का निर्माता कौन?
  14. ताजमहल का निर्माण हिन्दू वास्तुशिल्प के अनुसार
  15. शाहजहाँ भावुकता-शून्य था
  16. शाहजहाँ का शासनकाल न स्वर्णिम न शान्तिमय
  17. बाबर ताजमहल में रहा था
  18. मध्ययुगीन मुस्लिम इतिहास का असत्य
  19. ताज की रानी
  20. प्राचीन हिन्दू ताजप्रासाद यथावत् विद्यमान
  21. ताजमहल के आयाम प्रासादिक हैं
  22. उत्कीर्ण शिला-लेख
  23. ताजमहल सम्भावित मन्दिर प्रासाद
  24. प्रख्यात मयूर-सिंहासन हिन्दू कलाकृति
  25. दन्तकथा की असंगतियाँ
  26. साक्ष्यों का संतुलन-पत्र
  27. आनुसंधानिक प्रक्रिया
  28. कुछ स्पष्टीकरण
  29. कुछ फोटोग्राफ

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