|
इतिहास और राजनीति >> ताजमहल मन्दिर भवन है ताजमहल मन्दिर भवन हैपुरुषोत्तम नागेश ओक
|
|
|||||||
पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...
एक बार जब हम आगरा दुर्ग देखने गए तो एक दाढ़ीवाले मुसलमान से जो बाल्टी भरे हुए नहाने की तैयारी में था, हमने पूछा कि दुर्ग के किस भाग में औरंगजेब ने शिवाजी को बन्दी बनाकर रखा था। यह प्रश्न पूछने का हमारा उद्देश्य केवल प्रचलित धारणा का परीक्षण करना था, क्याक हम अपने मस्तिष्क में स्पष्ट थे कि शिवाजी को किले के बाहर रामसिंह के घर में बन्दी बनाकर रखा गया था। किन्तु उस मुसलमान ने तो बिना पलक झपकाए या उत्तर देने के लिए तनिक-सी भी झिझक दिखाने की अपेक्षा विभाजक दीवार से दूर एक ऐसे स्थान की ओर संकेत कर दिया जो सेना के अधिकार-क्षेत्र के भीतर था, इसलिए पर्यटक का वहाँ पहुँच सकना सम्भव नहीं था। तब हमें स्वयं के अनुभव से यह अनुभूति हुई कि किस प्रकार जन-सामान्य और उसी प्रकार इतिहास के अध्येता दोनों को ही असंदिग्ध व्यक्तियों द्वारा झूठे लिखित वक्तव्यों एवं उन मध्यकालीन ग्रन्थों द्वारा भ्रमित किया जाता रहा है जिनको तत्कालीन घटनाओं का आधिकारिक अभिलेख माना जाता है।
उपरिवर्णित अनेक सूत्रों से यह प्रकट हो गया है कि ताजमहल का निर्माण प्रासाद के रूप में हुआ, मकबरे के रूप में नहीं। इसकी भव्यता, मनोरंजन-मंडप, संगमरमर की जालियाँ, पच्चीकारी किया हुआ फर्श, समृद्धिशाली चाँदी के द्वार और सोने की जंजीरें, सैकड़ों कमरे, खवासपुरा और जयसिंहपुरा जैसे नाम, राजपूतों में पवित्र समझे जानेवाले पुष्प और रसीले फलों के उद्यान और इसी प्रकार की अन्य अनेक बातें इसका प्रमाण हैं।
मध्यकालीन मुस्लिम इतिहासकारों की असत्यता के प्रसंग में कीन उल्लेख करता है*-'भारतीय इतिहासकार अपने साम्राज्यीय संरक्षकों के कार्यों का गुणगान करते हुए उन्होंने प्रायः ऐसे वक्तव्य दिए हैं जो भावी छानबीन के समुज्ज्वल प्रकाश में नितान्त असत्य पाए जाते हैं। कीन उनको भारतीय कहने में भूलकर रहा है। वे तो विदेशी मुसलमान थे।"
* कीन की हैंडबुक, पृष्ठ १७१, वास्तव में कमरे २२ हैं।
अगले पृष्ठों में वह पुष्टि करता है कि "शाहजहाँ की कब्र असमान रूप से बनी है (पृ. १७२)। नदी की ओर के भूगर्भ में १४ कमरे हैं (पृ० १७७)।" उन कमरों के विषय में कीन कहता है-"विशाल भूगर्भ के सम्मुख आँगन के नीचे मध्य भाग में १४ भूगर्भ कक्षों की पंक्ति है। प्रत्येक कक्ष उन कमरों की पूरी लम्बाई में भीतरी द्वारों द्वारा पूर्व-पश्चिम तक एक-दूसरे से सम्बन्धित है। बरामदे के दोनों छोरों से नीचे जाने के लिए सीढ़ियाँ उतरती हैं, जहाँ उनका प्रवेश-द्वार लाल पत्थरों की शिलाओं से बन्द कर दिया गया है। वे तब तक अज्ञात रहे जबकि कुछ वर्ष पहले पूर्व में स्थित कुछ कक्षों के अधूरे बन्द किए हुए छिद्र दिखाई न दिए। वे कमरे जो कभी चित्रित तथा अन्यथा सज्जित थे, अब अन्धकार से भरे हैं जिनमें चिमगादड़ों ने अपना निवास बना लिया है, बिना प्रकाश के उनके भीतर कुछ देख पाना सम्भव नहीं है। क्या इन कक्षों में से नदी के घाट पर उतरने का मार्ग था और नदी की ओर से ये ताज में प्रवेश के द्वार थे या फिर इनके झरोखे ठंडी हवा के लिए ग्रीष्म ऋतु में नदी की ओर खोले जाते थे, इनका निर्णय अभी नहीं किया जा सकता।"
|
|||||
- प्राक्कथन
- पूर्ववृत्त के पुनर्परीक्षण की आवश्यकता
- शाहजहाँ के बादशाहनामे को स्वीकारोक्ति
- टैवर्नियर का साक्ष्य
- औरंगजेब का पत्र तथा सद्य:सम्पन्न उत्खनन
- पीटर मुण्डी का साक्ष्य
- शाहजहाँ-सम्बन्धी गल्पों का ताजा उदाहरण
- एक अन्य भ्रान्त विवरण
- विश्व ज्ञान-कोश के उदाहरण
- बादशाहनामे का विवेचन
- ताजमहल की निर्माण-अवधि
- ताजमहल की लागत
- ताजमहल के आकार-प्रकार का निर्माता कौन?
- ताजमहल का निर्माण हिन्दू वास्तुशिल्प के अनुसार
- शाहजहाँ भावुकता-शून्य था
- शाहजहाँ का शासनकाल न स्वर्णिम न शान्तिमय
- बाबर ताजमहल में रहा था
- मध्ययुगीन मुस्लिम इतिहास का असत्य
- ताज की रानी
- प्राचीन हिन्दू ताजप्रासाद यथावत् विद्यमान
- ताजमहल के आयाम प्रासादिक हैं
- उत्कीर्ण शिला-लेख
- ताजमहल सम्भावित मन्दिर प्रासाद
- प्रख्यात मयूर-सिंहासन हिन्दू कलाकृति
- दन्तकथा की असंगतियाँ
- साक्ष्यों का संतुलन-पत्र
- आनुसंधानिक प्रक्रिया
- कुछ स्पष्टीकरण
- कुछ फोटोग्राफ











