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इतिहास और राजनीति >> ताजमहल मन्दिर भवन है ताजमहल मन्दिर भवन हैपुरुषोत्तम नागेश ओक
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पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...
२१. केन्द्रीय संगमरमर भवन में २३ कक्षों को विद्यमानता संगमरमरी प्रासाद होने का सूचक है जो कि मकबरे के लिए नितान्त अनुपयोगी है।
२२. ताजमहल का रेखांकन, प्राचीन भारतीय वास्तुकला-पद्धति के अनुसार के हुआ है।
२३. समस्त ताज भवन परिसर के दो भूगर्भीय मंजिलों, ऊपरी मंजिलों तथा उसके अनेक स्तम्भों में ३५० या इससे भी अधिक बरामदेयुक्त कमरे हैं जो स्पष्टतया यह सिद्ध करता है कि इसका निर्माण प्रासाद के लिए हुआ था।
२४. अनेक संलग्न भवन, आरक्षी-निवास और अतिथि-कक्ष आदि प्रमाणित करते हैं कि यह प्रासाद है। ताज-परिसर में मनोरंजन-मंडप की विद्यमानता मकबरे में कभी नहीं हो सकती, वह तो केवल प्रासाद में ही हो सकता है।
२५. ताज-परिसर में एक नक्कारखाना भी है। किसी मकबरे में नक्कारखाना न केवल वयर्थ अपितु वह नितान्त अनुपयोगी है, क्योंकि मृतात्मा को शान्ति और विश्राम की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत राजप्रासाद में नक्कारखाने का होना नितान्त आवश्यक है, क्योंकि अतिथियों के स्वागत तथा विदाई के समय उनका उपयोग होता है, नगरवासियों को राजाज्ञा की घोषणा की सूचना देते समय उनको एकत्रित करने के लिए भी उसका उपयोग होता है।
२६. ताज-भवन परिसर में एक गोशाला भी है जो हिन्दू राजकीय भवन का एक भाग होती है।
२७. संस्कृत शब्द 'कलश' और 'प्राची' (गुम्बद और भवन के चारों ओर खुली जगह के अन्य कठघरे) ताज में कभी प्रयुक्त न होते यदि इसका निर्माण मुस्लिम मकबरे के रूप में होता।
२८. ताजमहल की सम्पूर्ण आलंकारिक सज्जा न केवल भारतीय पेड़-पौधों के रूप में रेखांकित हुई है अपितु कमल इत्यादि पवित्र भारतीय हिन्दू प्रतीक भी अंकित हैं जो इस्लामी विश्वास के आधार पर 'काफिराना' हैं और दफनाई गई, यदि वह दफनाई गई है तो मृतक महिला की आत्मा को शान्ति प्रदान नहीं कर सकते।
२९. गलियारे, मेहराब, स्तम्भ, गुम्बद सभी पूर्णरूप से हिन्दू पद्धति पर हैं, जो सारे राजस्थान में देखे जा सकते हैं।
३०. ताज के सम्बन्ध में अन्य सभी विषयों की भांति इसके निर्माण की अवधि भी अनेक लोगों ने अनेक प्रकार से १०, १२, १३, १७ और २२ वर्ष बताई है जो यह सिद्ध करता है कि प्रचलित कथा कपोल-कल्पित है।
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