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इतिहास और राजनीति >> ताजमहल मन्दिर भवन है

ताजमहल मन्दिर भवन है

पुरुषोत्तम नागेश ओक

प्रकाशक : हिन्दी साहित्य सदन प्रकाशित वर्ष : 2022
पृष्ठ :270
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 15322
आईएसबीएन :9788188388714

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पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...


३१. यहाँ तक कि टैवर्नियर का साक्ष्य कि उसने कार्य का आरम्भ और अन्त देखा था, जहां प्रचलित विश्वास को दुर्बल करता है वहाँ हमारी बात को बल प्रदान करता है।

३२. ये विवरण कि शाहजहाँ ने राजाओं और महाराजाओं पर प्रभूत मात्रा में कर लगाया था और तथाकथित कार्य (विकृतीकरण को १०, १२, १३, १७ अथवा यहाँ तक कि २२ वर्ष लगे थे) सब सत्य हैं। हम उनको पूर्णतया स्वीकार करते हैं। वे हमारी धारणा से सामंजस्य रखते हैं, क्योंकि शाहजहाँ नितान्त चतुर और निर्दय था, वह अपने कोष से एक पाई भी व्यय नहीं कर सकता था। उसने स्थानीय लोगों को दण्ड देने और जुरमाना वसूल करने का अवसर नहीं खोया। उसने तो अपनी पत्नी की मृत्यु से भी राजनीतिक लाभ उठाया। जहां उसने एक ओर राजा- महाराजाओं को, उनके ही किसी निकट सम्बन्धी के प्रासाद को मकबरे के रूप में परिवर्तित करने के लिए बलपूर्वक भेंट देने के लिए विवश किया वहाँ दूसरी ओर अत्यल्प भोजन सामग्री पर श्रमिकों एवं कारीगरों को भी कार्य करने के लिए विवश किया। यही कारण है कि यह कार्य चींटी की चाल से वर्षों तक चलता गया।

३३. वास्तुकार के विषय में पश्चिमी विद्वानों का कथन है कि वे योरोपियन थे और मुसलमानों का कथन है कि वे मुसलमान थे जबकि इंपीरियल लाइब्रेरी की पाण्डुलिपि में हिन्दू नामों का उल्लेख है। प्रचलित ताज कथा के सम्बन्ध में झूठे दावों के इससे बड़े और कौन-से प्रमाण की आवश्यकता है?

३४. ताजमहल में एक बहुत बड़ा उद्यान था। कब्रिस्तान में रसीले फलों एवं सुगन्धित पुष्पोंवाले पौधों का होना निषिद्ध माना गया है। इसलिये उद्यान केवल प्रासाद का ही अंग हो सकता है, कब्रिस्तान का नहीं।

३५. उस उद्यान के वृक्षादि के नाम संस्कृत के हैं और वे भी चुने हुए पवित्र यथा केतकी, जई, जुही, चम्पा, मौलश्री, हरश्रृंगार और बिल्व वृक्ष हैं।

३६. ताजमहल का रेखांकनकर्ता अविदित है।

३७. ताज पर किसी प्रकार का व्यय करना तो दूर वह तो शाहजहाँ के लिए सोने का अंडा देनेवाली मुर्गी सिद्ध हुआ। जबकि अर्जुमन्दबानो को ठंडे, पथरीले स्थान पर दफनाया गया और भवन की सारी मूल्यवान् सम्पत्ति लूटकर शाहजहाँ के कोष में जमा करा दी गई।

३८. ताजमहल उन दो बस्तियों के मध्य स्थित है जिन्हें जयसिंहपुरा और खवासपुरा कहते हैं और ये नाम राजपूती हैं मुसलमानी नहीं। संस्कृत में 'पुर' का अभिप्राय व्यस्त नगरी से है न कि किसी खुले मैदान से।

३९. ताजमहल का प्रवेश-द्वार दक्षिणाभिमुख है। यदि यह मुस्लिम भवन होता तो इसका द्वारा पश्चिमाभिमुख होता।

४०. इसकी सज्जा और संगमरमर का काम ९६७ में निर्मित आमेर (जयपुर) प्रासाद के अनुरूप है।

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    अनुक्रम

  1. प्राक्कथन
  2. पूर्ववृत्त के पुनर्परीक्षण की आवश्यकता
  3. शाहजहाँ के बादशाहनामे को स्वीकारोक्ति
  4. टैवर्नियर का साक्ष्य
  5. औरंगजेब का पत्र तथा सद्य:सम्पन्न उत्खनन
  6. पीटर मुण्डी का साक्ष्य
  7. शाहजहाँ-सम्बन्धी गल्पों का ताजा उदाहरण
  8. एक अन्य भ्रान्त विवरण
  9. विश्व ज्ञान-कोश के उदाहरण
  10. बादशाहनामे का विवेचन
  11. ताजमहल की निर्माण-अवधि
  12. ताजमहल की लागत
  13. ताजमहल के आकार-प्रकार का निर्माता कौन?
  14. ताजमहल का निर्माण हिन्दू वास्तुशिल्प के अनुसार
  15. शाहजहाँ भावुकता-शून्य था
  16. शाहजहाँ का शासनकाल न स्वर्णिम न शान्तिमय
  17. बाबर ताजमहल में रहा था
  18. मध्ययुगीन मुस्लिम इतिहास का असत्य
  19. ताज की रानी
  20. प्राचीन हिन्दू ताजप्रासाद यथावत् विद्यमान
  21. ताजमहल के आयाम प्रासादिक हैं
  22. उत्कीर्ण शिला-लेख
  23. ताजमहल सम्भावित मन्दिर प्रासाद
  24. प्रख्यात मयूर-सिंहासन हिन्दू कलाकृति
  25. दन्तकथा की असंगतियाँ
  26. साक्ष्यों का संतुलन-पत्र
  27. आनुसंधानिक प्रक्रिया
  28. कुछ स्पष्टीकरण
  29. कुछ फोटोग्राफ

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