जीवन कथाएँ >> लज्जा लज्जातसलीमा नसरीन
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प्रस्तुत उपन्यास में बांग्लादेश की हिन्दू विरोधी साम्प्रदायिकता पर प्रहार करती उस नरक का अत्यन्त मार्मिक चित्रण प्रस्तुत किया गया है...
'मुझसे नौकरी-चाकरी नहीं होगी।' कहकर वह छुटकारा पा गया। बाहर के कमरे में रोगी देखते हुए डॉक्टर सुधामय परिवार पाल रहे हैं। पार्टी ऑफिस, मधु की कैंटीन, 'घातक दलाल निर्मूल कमेटी' का ऑफिस, प्रेस क्लब बत्तीस नम्बर में सारा दिन घूमते हुए थक-हार कर सुरंजन देर रात घर लौटता है। टेबिल पर खाना ढंका रहता है। किसी दिन खाता है, किसी दिन भूखे ही सो जाता है। इसी तरह धीरे-धीरे उसके और परिवार के बीच दूरी बढ़ती जा रही थी। लेकिन आज सुबह जब किरणमयी चाय देने के लिए आयी और उसके बिस्तर पर बैठी तो उसे लगा कि आज भी उस जैसे निकम्मे, उदासीन, गैर-जिम्मेदार बेटे पर माँ-बाप का पूरा-पूरा भरोसा है। क्या दिया है उसने परिवार को? किसी समय के सम्पन्न सुधामय अब भात-दाल भर से संतुष्टि की डकार लेते हैं। सुरंजन भी संतुष्ट होता है, उसे याद है, बचपन में नाक दबाकर उसे दूध पिलाया जाता था। मक्खन न खाने पर पिटाई होती थी। अगर वह बचपन की तरह किरणमयी से कहे कि उसे लोटा भर दूध चाहिए, मलाई चाहिए, मक्खन चाहिए, दोपहर को खाने के साथ मछली चाहिए, घी का परांठा चाहिए, तो क्या सुधामय खिला पायेंगे? यह और बात है कि सम्पन्नता और विलासिता के प्रति उसकी कोई रुचि नहीं है। उसकी रुचि न होने का कारण भी सुधामय ही हैं। जब उसके हमउम्र लड़के नये डिजाइन का पैंट-शर्ट पहनते थे, तब सुधामय उसके लिए आइंस्टाइन, न्यूटन, गैलिलियो की जीवनी, फ्रांसीसी क्रांति का इतिहास, द्वितीय विश्वयुद्ध की कहानी, गोर्की-टाल्सटाय आदि की किताबें खरीद कर लाते थे। सुधामय चाहते थे कि उनका बेटा इन्सान बने। आज सुबह उस जातिहीन बिल्ली को ढूँढ़ते हुए उसके मन में सवाल उठ रहा था कि क्या सचमुच वह इन्सान बन पाया है? उसके अन्दर कोई लोभ नहीं है। सम्पदा के प्रति कोई मोह नहीं है। खुद के स्वार्थ से दूसरों के स्वार्थ को बढ़कर देखता है। क्या इसे इन्सान बनना कहा जाता है! सुरंजन बेमन से बरामदे में टहलता रहता है। सुधामय एक पत्रिका पढ़ रहे थे। लड़के को देखते ही पुकारा, 'सुरंजन, सुनो!'
'कहिए!' पलंग का हैंडिल पकड़कर वह खड़ा हो गया।
'जोशी और आडवाणी सहित आठ नेता गिरफ्तार किये गये हैं, सुने हो? वहाँ चार सौ से अधिक व्यक्तियों की मृत्यु हुई है। यू. पी. के कल्याण सिंह की भी सुनवाई होगी। अमेरिका, यहाँ तक कि सारा विश्व बाबरी मस्जिद के टूटने की निन्दा कर रहा है। भोला मैं कर्फ्यू जारी किया गया है। साम्प्रदायिक सद्भाव की रक्षा के लिए बी. एन. पी., अवामी लीग के साथ-साथ कई दल रास्ते में उतर पड़े हैं। वे विवरण दे रहे हैं।' सुधामय की आँखों की पुतलियों में बिल्ली की आँख की तरह माया भरी हुई है।
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