लोगों की राय

आचार्य श्रीराम शर्मा >> आन्तरिक कायाकल्प का सरल किन्तु सुनिश्चित विधान

आन्तरिक कायाकल्प का सरल किन्तु सुनिश्चित विधान

श्रीराम शर्मा आचार्य

प्रकाशक : युग निर्माण योजना गायत्री तपोभूमि प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :172
मुखपृष्ठ :
पुस्तक क्रमांक : 4194
आईएसबीएन :0000

Like this Hindi book 5 पाठकों को प्रिय

237 पाठक हैं

आन्तरिक कायाकल्प का सरल विधान....


प्रज्ञा परिवार के प्राथमिक सदस्यों को न्यूनतम चिह्न पूजा की तरह एक घण्टा समय और दस पैसा नित्य ज्ञानयज्ञ के लिए लगाते रहने के लिए बाधित किया जाता है। जागृत आत्माओं, प्राणवान प्रज्ञापुत्रों को इससे कुछ अधिक करने का दबाव डाला जाता है। उन्हें महीने में एक दिन की आजीविका एवं अवकाश के क्षणों का महत्वपूर्ण अंश समयदान के रूप में देते रहने के लिए कहा जाता है। आत्मोत्कर्ष की दिशा में सच्ची आकांक्षा जगाने और यथार्थवादी तत्परता उभारने के लिए प्रत्यक्ष चिहन है। जिनमें ऐसा कुछ दृष्टिगोचर न हो, कृपण निष्ठुरता चट्टान की तरह अड़ी बैठी रहे, न श्रद्धा उमँगे और न उदार सेवा साधना का कोई चिन्ह उभरे तो समझना चाहिए कि ऊसर भूमि में कृषि कर्म करने, उद्यान लगाने की निरर्थक विडम्बना पल रही है।

कल्प साधना में प्रायश्चित प्रसंग प्रमुख है। उसका छोटा अंश उपवास अनुष्ठान है जो मात्र थोड़े से काय-कष्ट से अति सरलतापूर्वक सम्पन्न हो जाता है। बड़ा काम वह है जिसमें दुष्कर्मों द्वारा समाज को पहुँचाई गई क्षति की भरपाई करनी पड़ती है अर्थात सम्प्रवृत्ति सम्वर्धन के लिए श्रमदान, अंशदान के रूप में उतनी उदारता का परिचय देना पड़ता है, जिससे खोदी गई खाई का पट सकना सम्भव हो सके। मनन प्रक्रिया में दोनों ही तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह निर्धारण किया जाना चाहिए कि उपलब्ध समय एवं साधनों में से कितना अंश आरम्भ में एक बारगी लगाया जाना है और कितना भविष्य में किस अनुपात में नियोजित होता रहेगा।

जीवन-व्यवसाय के लाभांश का विभाजन इस प्रकार होना चाहिए कि शरीर तथा उसका सम्पर्क परिकर ही सब कुछ न निगलता, हड़पता रहे, वरन् उपलब्धियों का एक महत्वपूर्ण अंश परमार्थ प्रयोजनों के लिए नियमित रूप से लगाने लगे। अभ्यस्त कृपणता, सम्बन्धियों का व्यामोह तथा प्रचलनों का दबाव, तथाकथित मित्रों का उपहास असहयोग बोधक हो सकता है। इनके चक्रव्यूह से किस प्रकार निपटा जायेगा, इसका साहसिक निर्धारण भी मनन प्रक्रिया के साथ-साथ ही करना होता है।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

    अनुक्रम

  1. अध्यात्म क्षेत्र की उच्चस्तरीय सफलताओं का सुनिश्चित राजमार्ग

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book