लोगों की राय

जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :188
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6042
आईएसबीएन :9788170287285

Like this Hindi book 4 पाठकों को प्रिय

57 पाठक हैं

प्रस्तुत है महात्मा गाँधी की आत्मकथा ....


आश्रम मेंबीमारी मुश्किल से ही आती थी। कहना चाहिये कि इसमे जलवायु का और अच्छे तथा नियमित आहार का भी बडा हाथ था। शारीरिक शिक्षा के सिलसिले में ही शारीरिकधंधे की शिक्षा का भी मैं उल्लेख कर दूँ। इरादा यह था कि सबको कोई-न-कोईउपयोगी धंधा सिखाया जाय। इसके लिए मि. केलनबैक ट्रेपिस्ट मठ से चप्पलबनाना सीख आये। उनसे मैं सीखा और जो बालक इस धंधे को सीखने के लिए तैयारहुए उन्हें मैंने सिखाया। मि. केलनबैक को बढ़ई काम का थोड़ा अनुभव था औरआश्रम में बढ़ई का काम जानने वाला एक साथी था, इसलिए यह काम भी कुछ हद तकबालकों को सिखाया जाता था। रसोई का काम तो लगभग सभी बालक सीख गये थे।

बालकों के लिए ये सारे काम नये थे। इन कामों को सीखने की बात तो उन्होंने स्वप्नमें भी सोची न होगी। हिन्दुस्तानी बालक दक्षिण अफ्रीका में जो कुछ भीशिक्षा पाते थे, वह केवल प्राथमिक अक्षर-ज्ञान की ही होती थी। टॉल्सटॉयआश्रम में शुरू से ही रिवाज डाला गया था कि जिस काम को हम शिक्षक न करें, वह बालकों से न कराया जाय, और बालक जिस काम में लगे हो, उसमें उनके साथउसीकाम को करनेवाला एक शिक्षक हमेशा रहे। इसलिए बालकों ने कुछ सीखा, उमंग केसाथ सीखा।

चरित्र और अक्षर-ज्ञान के विषय में आगे लिखूँगा।

...Prev | Next...

<< पिछला पृष्ठ प्रथम पृष्ठ अगला पृष्ठ >>

अन्य पुस्तकें

लोगों की राय

No reviews for this book