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जीवनी/आत्मकथा >> सत्य के प्रयोग

सत्य के प्रयोग

महात्मा गाँधी

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2018
पृष्ठ :188
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 6042
आईएसबीएन :9788170287285

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प्रस्तुत है महात्मा गाँधी की आत्मकथा ....

बिहारी की सरलता


मौलाना मजहरुल हक और मोहन दास करमचंद गाँधी एक समय लंदन में पढते थे। उसके बादबम्बई में सन् 1915 की कांग्रेस में मिले थे। उस साल वे मुस्लिम लीग के अध्यक्ष थे। उन्होंने पुराना पहचान बताकर कहा था कि आप कभी पटना आये, तोमेरे घर अवश्य पधारिये। इस निमंत्रण के आधार पर मैंने उन्हें पत्र लिखा औरअपना काम बतलाया। वे तुरन्त अपनी मोटर लाये और मुझे अपने घर ले चलने काआग्रह किया। मैंने उनका आभार माना और उनसे कहा कि जिस जगह मुझे जाना हैवहाँ के लिए पहली ट्रेन से रवाना कर दे। रेलवे गाइड से कुछ पता नहीं चलसकता था। उन्होंने राजकुमार शुक्ल से बाते की और सुझाया कि पहले मुझेमुजफ्फरपुर जाना चाहिये। उसी दिन मुजफ्फरपुर की ट्रेन जाती थी। उन्होंनेमुझे उसमें रवाना कर दिया। उन दिनो आचार्य कृपलानी मुजफ्फरपुर में रहते थे। मैं उन्हें जानता था। जब मैं हैदराबाद गया था तब उनके महान त्याग की,उनके जीवन की और उनके पैसे से चलने वाले आश्रम की बात डॉ. चोइथराम के मुँहसे सुनी थी। वे मुजफ्फरपुर कॉलेज में प्रोफेसर थे। इस समय प्रोफेसरी छोड़चुके थे। मैंने उन्हे तार किया। ट्रेन आधी रात को मुजफ्फरपुर पहुँचती थी। वे अपने शिष्य-मंडल के साथ स्टेशन पर आये थे। पर उनके घरबार नहीं था। वेअध्यापक मलकानी के यहाँ रहते थे। मुझे उनके घर ले गये। मलकानी वहाँ के कॉलेज में प्रोफेसर थे। उस समय के वातावरण में सरकारी कॉलेज के प्रोफेसरका मुझे अपने यहाँ टिकाना असाधारण बात मानी जायेगी।

कृपालानी जीने बिहार की और उसमें भी तिरहुत विभाग की दीन दशा की बात की और मेरे कामकी कठिनाई की कल्पना दी। कृपालानीजी ने बिहारवालो के साथ घनिष्ठ संबन्धजोड़ लिया था। उन्होंने उन लोगों से मेरे काम का जिक्र कर रखा था। सबेरेवकीलों का एक छोटा सा दल मेरे पास आया। उनमें से रामनवमीप्रसाद मुझ याद रहगये है। उन्होंने अपने आग्रह से मेरा ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंनेकहा, 'आप जो काम करने आये है, आपको तो हम-जैसो के यहाँ ठहरना चाहिये।गयाबाबू यहाँ के प्रसिद्ध वकील है। उनकी ओर से मैं आग्रह करता हूँ कि आप उनके घर ठहरिये। हम सब सरकार से डरते जरूर है। लेकिन हमसे जितनी बनेगीउतनी मदद हम आपकी करेंगे। राजकुमार शुक्ल की बहुत सी बाते सच है। दुःख इस बात का है कि आज हमारे नेता यहाँ नहीं है। बाबू ब्रजकिशोरप्रसाद औऱराजेन्द्रप्रसाद को मैंने तार किये है। दोनों तुरन्त यहाँ आ जायेंगे और आपको पूरी जानकारी व मदद दे सकेंगे। मेंहरबानी करके आप गयाबाबू के यहाँचलिये।'

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