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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण भारत की एकता का निर्माणसरदार पटेल
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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण
यह बोझ आप सब जल्दी उठाएँ। उसकी तैयारी करें। जो काग्रेस में नहीं है, वह भी हमसे कहते हैं कि भई जल्दी यह काम करो। यह राजकाज कांग्रेस वालों को ही दे दो। इससे हमें कोई नुकसान नहीं है और न कोई बखेड़ा होने वाला है। ऐसा हो जाए, तो हमारी फौज अपनी बैरकों में बैठकर मौज करे। वह इधर क्यों आए? आपके सामने मिलिटरी को क्यों लाना पड़े? यह तो जब जमाना था, तब उसे लाना पड़ा। अब वह चला गया और अब फौज की क्या जरूरत है? उसको हम क्यों तकलीफ दें? जब हिन्दुस्तान पर मुसीबत हो, तब उनका काम है।
और जो हैदराबाद की पुरानी पुलिस है, उसको मैं बड़े अदब से कहना चाहता हूँ कि खुदा का नाम याद करके जो तुम खाते हो, उसको हराम न करो। यदि आप से यह काम नहीं होता, तो मेहरबानी करके छोड़ दो। क्योंकि अब जमाना बदल गया है। अब हमें इन्साफ से और वफादारी से काम करना है। जितना पैसा हम लेते हैं, उसको हराम नहीं करना है। हमें पूरा काम करना है। न हो सके तो हट जाएँ। हैदराबाद की रियासत में जो अमलदार लोग पड़े हैं, उनसे भी मैं कहूँगा कि आप लोगों को पिछला सभी कुछ भुलकर ठीक तरह से काम करना है। क्योंकि यदि आपके दिल में कभी कोई ख्वाहिश हो कि हैदराबाद में कोई पलटा हो जाए तो कोई दूसरी चीज आएगी, यह होने वाला नहीं है। हिन्दुस्तान का इतिहास बदल गया, उसका भूगोल बदल गया और अब हम इस तरह से काम करना चाहते हैं कि हिन्दुस्तान के रहने वाले सब लोगों का कल्याण हो और सब का भला हो। सबको अच्छी तरह से खाना-पीना मिले, कोई दुखी न रहे। उस काम में आप लोगों को साथ देना है। पहले हम गलत रास्ते पर चलते थे, अब हमें सही रास्ते पर जाना है। तो सही रास्ते पर चलने में आप लोगों को मदद करनी है। नहीं करनी, तो मेहरबानी करके छोड़ दीजिए।
मैं आप सबसे यह कहना चाहता हूँ कि जो ढाँचा, जो तन्त्र हमारे पास है, वह इस प्रकार का तन्त्र है कि यदि वह आपके हाथ में देंगे, तो आप उसे चला न सकेंगे। जो कुछ भी बनेगा, वह आखिर हमारे पास तो रहने वाला नहीं है। जब चुनाव होगा, तो जिसे आप वोट देंगे, सत्ता उसी के पास जाएगी। तब इसके भीतर बैठकर आप इस चीज़ को किस तरह से चलाएँगे, वह आपका ही काम होगा। तो आपको ऐसा काम नहीं करना चाहिए, जिसमें आपका ही नुकसान हो। उससे खाली आपका ही नहीं, सारे हिन्दुस्तान का नुकसान होगा। आज दुनिया बहुत छोटी हो गई है। कोई भली-बुरी चीज़ हम इधर करें, तो वह सारी दुनिया में जाती है। दुनिया कहती है कि ये ऐसे पागल और बेवकूफ हैं कि इस तरह से काम करते हैं। हैदराबाद का दरवाजा सब तरफ से खुला है। परदेशी लोग तो इधर आते हैं और देखते हैं। हमें कोई धोखा नहीं करना था, जो हम हैदराबाद के दरवाजे बन्द करते। क्यों हम धोखा करें? हमने एलान कर दिया कि हैदराबाद का भविष्य हैदराबाद के लोगों के सुपुर्द है। आज सारी दुनिया का एक ही रास्ता है। डेमोक्रेसी (प्रजातन्त्र) को सब कबूल करते है। कोई दूसरा रास्ता हो ही नहीं सकता। तो हम किसी को रोकने की कोशिश क्यों करे? क्या हमारे में कोई ऐब है? क्या हम कोई ऐसी बुरी चीज़ करना चाहते हैं, जिसे हम दुनिया से छिपाएँ? हम ऐसा कोई काम नहीं करना चाहते, जो हमें छिपाना पड़े।
हैदराबाद में आपकी सरकार बन जाय, ऐसी मेरी ख्वाहिश है। उसमें मेरी जो कुछ मदद होगी, उसे करने को मैं तैयार रहूँगा। मैं आपसे बहुत अदब से और प्रेम से प्रार्थना करूँगा कि आप लोग खुदा की बन्दगी करते रहें कि बहुत दिनों तक हमने दुख उठाए हैं और अब अधिक दुख हमारे सर पर न आएँ। साथ ही यह भी कि हम योग्यता प्राप्त करें और ईश्वर हमको गलत रास्ते पर न चलने दे। मैं एक दफे फिर भी नौजवानों से प्रार्थना करता हूँ कि गलत रास्ते पर न चलो। हमको मजबूर न करो कि हमारे हाथ से आप लोगों को जेल में जाना पड़े या आपके पीछे गोली लेकर सिपाहियों को भेजना पड़े। यह बहुत बुरा काम है, इससे हमको बहुत कष्ट होता है। इससे आपको भी कष्ट होना चाहिए। इतिहास में कई सदियों के बाद हिन्दुस्तान को मौका मिला है। इतना बड़ा एक हिन्दुस्तान, आजाद हिन्दुस्तान, पहले कब था? अब उसकी जगह कहां होनी चाहिए? दुनिया के मुल्कों में अपनी जगह पर बैठाने का जो सौभाग्य हमें प्राप्त हुआ है, उसको हम फेंक दें तो इससे अधिक बुरा और क्या होगा। हमें ऐसे काम करने चाहिए कि भविष्य की प्रजा कहे कि हमारे पूर्वज बड़े लायक थे, बहुत नेक थे। आपकी औलाद होना वे गर्व की बात समझें। देखिए, आपके सामने क्या हो रहा है? हमारे लोग मारे-पीटे जाते हैं। देखिए, बर्मा में क्या हो रहा है। वहाँ से भाग-भागकर लोग मद्रास में आ रहे हैं। हम तो आजाद हुए, लेकिन हमारे जो लोग पड़े हैं, उनकी अब तक जो इज्जत होनी चाहिए, वह नहीं हुई। क्यों? इसलिए कि हम खुद आज़ाद तो हुए, लेकिन हम स्वस्थ नहीं हुए। हमारी आज़ादी ऐसी होनी चाहिए कि दुनिया में सब जगह हमारी इज्जत बड़े और सब लोग मानें कि हम लोग नेक हैं। इसी प्रकार की आजादी के लिए हमने काम किया था। उसमें हैदराबाद अलग नहीं रह सकता। उसको भी हमें साथ लेना है। उसको साथ लेने की हमने भरसक कोशिश की है। इसी में आप सब का सुख है। एक दूसरे के साथ किसी का बैर बढ़ा कर नुकसान करने के लिए हमने वैसा नहीं किया।
आज आप लोगों ने बड़े प्रेम से मेरा जो स्वागत किया, इसके लिए मैं आपका ऋणी हूँ। आपको धन्यवाद देना चाहता हूँ। बहुत धूप में इतनी बड़ी संख्या में इतने समय से मेरी बात सुनने के लिए बैठे रहे। इससे मुझे बहुत खुशी होती है। लेकिन अगर आप मेरा स्वागत करते हैं, मुझ पर प्रीति रखते हैं, तो मेरी बात आपको सुननी चाहिए और उसे मानना चाहिए। मैं जो कुछ कहता हूँ, आपकी भलाई के लिए कहता हूँ, मुल्क की भलाई के लिए कहता हूं। खुदा हाफिज!
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- वक्तव्य
- कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
- लखनऊ - 18 जनवरी 1948
- बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
- बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
- दिल्ली - 18 फरवरी 1948
- पटियाला - 15 जुलाई 1948
- नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
- गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
- बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
- नागपुर - 3 नवम्बर 1948
- नागपुर - 4 नवम्बर 1948
- दिल्ली - 20 जनवरी 1949
- इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
- जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
- हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
- हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
- मैसूर - 25 फरवरी 1949
- अम्बाला - 5 मार्च 1949
- जयपुर - 30 मार्च 1949
- इन्दौर - 7 मई 1949
- दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
- बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
- कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
- दिल्ली - 29 जनवरी 1950
- हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950








