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इतिहास और राजनीति >> भारत की एकता का निर्माण भारत की एकता का निर्माणसरदार पटेल
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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण
मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि बहुत दिनों के बाद हमारा मुल्क गुलामी से छूट गया है और आज हमारे सामने बहुत से मैदान हैं। काम करने का बड़ा मैदान हमारे सामने खुला पड़ा है। यदि हमारे में योग्यता होगी, तो हमें बहुत से ओपनिंग (निकास) मिलने वाले हैं। लोगों को डिग्री लेने के बाद पहले चाकरी हासिल करने के लिए जो दौड़भाग करनी पड़ती थी, वह आप लोगों को नहीं करनी पड़ेगी। परन्तु यह तभी होगा, यदि आप में योग्यता होगी। कई सदियोंके बाद यह मौका हमें मिला है। तो हमारा कर्तव्य है कि इससे लाभ उठाएँ। यह डिग्री लेकर हमने यह प्रतिज्ञा ली कि हम खुदा की बन्दगी करेंगे और अपने फर्ज पूरे करेंगे, इसके लिए खुदा हमें योग्यता दें। हमें नम्रता से कहना चाहिए कि यह हमारा मुल्क है, जिसमें हमारा जन्म हुआ, जिसमें हमने शिक्षा पाई और जिसमें हमें अपनी जिन्दगी बसर करनी है। अपने मुल्क की तरक्की के लिए हमारा क्या कर्तव्य है, क्या जिम्मेदारी है, यह सब चीज़ हमारे ख्याल रखने की है। पीछे जो हमारी गल्तियाँ हुईं, खुदा वैसी गल्ती हमसे फिर न कराए, इसके लिए भी हमें प्रार्थना करनी है। खुदा की इबादत करना और भाई भाई की तरह हिन्दुस्तान में रहना हमारा फर्ज है। हिन्दुस्तान की इज्जत बढ़ाने के लिए, हिन्दुस्तान के सच्चे सपूत के मुआफिक हम रहें और रहना सीख लें, तभी यूनिवर्सिटी की जो डिग्री हमने पाई है, इसकी योग्यता हममें होगी।
वाइस चांसलर साहब ने मेरे बारे में जो बातें कहीं, उनके बारे में मैं आपसे कुछ न कहूँगा। क्योंकि मैं जानता हूँ कि मैं कहाँ हूँ और मेरा स्थान क्या है। मुझे यदि अपनी जगह का ख्याल न होता, तब तो मैं पागल हो जाता। लेकिन मैं जानता हूँ कि मैं हिन्दुस्तान के एक वफादार सिपाही की जगह पर खड़े रहना चाहता हूँ और यदि वफादारी के इस मार्ग से मैं एक कदम भी चूक जाऊँ, तो मै खुदा से प्रार्थना करूँगा कि मेरा जीवन उसी समय खत्म हो जाए। क्योंकि इन्सान की असली कदर तो उसके जीवन के बाद होती है। मरने तक जो गलती नहीं करता, तभी उसका जीवन ठीक होता है। लेकिन ऐसे लोग कितने है, जिन्हें यकीन होगा कि वे कभी गल्ती न करेंगे? ऐसा दावा कौन कर सकता है? तो हमारी प्रार्थना होनी चाहिए कि जबतक खुदा हमें जिन्दगी दे, तब तक हम सही रास्ते पर चलें और कोई गलती न करें। बड़ी नम्रता से हमें हमेशा खुदा से यही प्रार्थना करनी चाहिए।
अपने जीवन में हम जो कुछ कर पाते हैं, वह कोई बड़ी बात नहीं है, जिसके लिए हम मगरूरी ले सकें। क्योंकि जो कुछ हम करते हैं, उसमें हमारा क्या भाग है? असल में कराने वाला तो खुदा है। इन्सान तो खाली एक हथियार बनता है। इन्सान यदि जागृत हो तो उसका यह धर्म हो जाता है कि हमेशा प्रार्थना करें और कोशिश करें कि उससे कोई गल्ती न हो। अभी आप नौजवानों ने खुदा से प्रार्थना की है। आप नौजवानों को और जिन विद्यार्थियों को उम्मीद है कि आगे चल कर उन्हें भी ऐसी पदवी मिले, उनसे मैं एक ही बात कहूँगा कि हमारे देश की इज्जत को कोई भी दाग लगे, ऐसा कोई काम आप से कभी न हो। आप के कारनामों से हमारी इज्जत हमेशा बढ़ती रहे और दुनिया में लोग कहें कि हिन्दुस्तान के नौजवान भारत के स्वतन्त्र हो जाने के बाद दूसरे प्रकार के बन गए हैं। हमारे लोग भी समझें और दुनिया के लोग भी समझें कि भारत की जो पुरानी संस्कृति थी, ये नौजवान उसके वारिस हैं।
उस जमाने का नाम लेकर आजकल जो लोग युनिवर्सिटियों के नौजवानों को गलत रास्ते पर ले जा रहे हैं, वह मुल्क की भलाई की नहीं, बल्कि मुल्क को गिराने की कोशिश कर रहे हैं। वे आपस में लड़ते हैं और देश तथा नौजवानों का नुकसान ही करते हैं। वे लोग असली भारतीय संस्कृति को छोड़ कर पराई संस्कृति के मोह में पड़े हैं और वे मुल्क को आगे ले जाने वाले नहीं है।
आपने अपनी यूनिवर्सिटी की तरफ से मुझे भी पदवी-दान दिया है। जैसे आपको प्रयत्न करना है, वैसे ही मुझे भी कोशिश करनी है कि इस पदवी के लिए खुदा मुझ को योग्यता दे। और मैं उसकी कोशिश करूँगा खुदा आपका भला करे।
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- वक्तव्य
- कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
- लखनऊ - 18 जनवरी 1948
- बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
- बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
- दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
- दिल्ली - 18 फरवरी 1948
- पटियाला - 15 जुलाई 1948
- नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
- गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
- बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
- नागपुर - 3 नवम्बर 1948
- नागपुर - 4 नवम्बर 1948
- दिल्ली - 20 जनवरी 1949
- इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
- जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
- हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
- हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
- मैसूर - 25 फरवरी 1949
- अम्बाला - 5 मार्च 1949
- जयपुर - 30 मार्च 1949
- इन्दौर - 7 मई 1949
- दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
- बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
- कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
- दिल्ली - 29 जनवरी 1950
- हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950








