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भारत की एकता का निर्माण

सरदार पटेल

प्रकाशक : प्रकाशन विभाग प्रकाशित वर्ष : 2005
पृष्ठ :350
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 62
आईएसबीएन :

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स्वतंत्रता के ठीक बाद भारत की एकता के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा देश की जनता को एकता के पक्ष में दिये गये भाषण


पंजाब में जब पिछली बार मैं आया था, उस वक्त हालत बहुत बुरी थी। मैंने सिक्ख लीडरों को जमा किया और उन्हें समझाया कि आप मुत्तहिद हो जाएँ। आजकल झगड़ा करने से काम खराब होगा। हमारे दस लाख आदमी पाकिस्तान से इधर न आ सकेंगे। उधर जो मुसलमान जा रहे हैं, उन्हें रास्ता न देने से असुविधा होगी। आप रास्ता नहीं देते। इधर बारिश हो रही है। खाने का ठिकाना नही है। दुनिया कहती है कि क्या हम पागल हो गए हैं। अंग्रेजों ने तो हमें आजाद कर दिया पर हम खुद निभा नहीं रहे। मुसलमानों को जाने का रास्ता दे दीजिये। नहीं तो हम बदनाम होंगे। मैंने यह सब कहा तो उस वक्त सिक्ख लीडरों ने मान लिया और रास्ता दे दिया। हमारे लोग इधर चले आए और उनके उधर चले गए।

अब हालत यह है कि जख्म से खून आना तो बन्द हो गया है, लेकिन जख्म ठीक नहीं हुआ। तो पहला काम तो यह होना चाहिए कि नया खून न निकले। फिर आहिस्ता-आहिस्ता जख्म ठीक हो जाएगा। उसके लिए काम करना है। तो मास्टर तारासिंह इस जख्म पर ठोकर लगा रहे हैं। यह गलत बात है। इससे तो जिस्म में से फिर से खून बहने लगेगा। जख्म बन्द नहीं होगा। मैंने बहुत कोशिश की और कहा कि इस तरह न करो।

मैं सब सिक्ख भाइयों से अपील करता हूँ कि आपका भला इसी में है। आप मास्टर तारासिंह को समझाइए कि वह गलत रास्ते पर चलना छोड़ दें। अगर आप उनके साथ रहेंगे, जत्थे भेजेंगे, तो काम खराब होगा। अमृतसर से, पटियाला से जत्थे आएँगे। आप लोगों को भी तकलीफ होगी, हमें भी।

मास्टर तारासिंह जी को रिहा कराना आपका काम है। वह मेरे हाथ में नहीं। मै पंजाब हुकूमत से कहूँगा कि अपना घर ठीक करो। आज की हालत में यदि हुकूमत रखनी है, तो सबको आपस में झगड़ा नहीं करना चाहिए। यह लोकराज है। सब को एक साथ रहना है। हमें एक दिल होकर काम करना चाहिए। पंजाब का काम भी हमें एक दिल होकर करना है। असेम्बली के मेंबरों से भी मैं कहूंगा कि उन्हें भूलना नहीं चाहिए कि हम पर कितना बोझ पड़ा है। तुम आपस में झगड़कर हमारे मुल्क की तरक्की रोक रहे हो। तुम में इत्तफाक होना चाहिए, एक दूसरे का मैल धो देना चाहिए, एक ही आवाज से काम करना चाहिए और जितनी जल्दी हो सके, पंजाब का नए सिरे से निर्माण करना चाहिए।

शायद आप समझते हैं कि मैं कड़ी बात कहता हूं। लेकिन आपको समझना चाहिए कि मै अपने दिल का दर्द आपको सुना रहा हूँ। मेरी बात आप को माननी चाहिए। उसका हौसला बँधाना चाहिए। आज हिन्दुस्तान पर मुसीबत है, यह आपको हर समय याद रखना चाहिए।

आप का भविष्य आप के भूत की तरह शानदार है। आप दुनिया में सब से बड़ी पदवी हासिल कर सकते हैं। हमारे मुल्क में गान्धी जी जैसी हस्ती पैदा हुई। दुनिया भर के लोग उनके रास्ते पर चल रहे हैं। और वही रास्ता सही है।

मैंने अगर कोई कड़ी बात कही है, तो आपकी भलाई के लिए कही है। मेरे इधर आने का खास मकसद ही यही था कि आप लोगों के सामने खास सवालों का नक्शा पेश करूँ। आप लोगों ने मझे इतनी बड़ी इज्जत दी, मेरा प्रेम से स्वागत किया, इसके लिए मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूँ और फिर परमात्मा को भी नमस्कार करता हूँ। मैंने जो बातें आपसे कही हैं, उन्हें समझ कर पंजाब को आगे बढ़ाने के लिए आप परमात्मा से प्रार्थना करें तो आपको सफलता प्राप्त होगी।

जयहिन्द!

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    अनुक्रम

  1. वक्तव्य
  2. कलकत्ता - 3 जनवरी 1948
  3. लखनऊ - 18 जनवरी 1948
  4. बम्बई, चौपाटी - 17 जनवरी 1948
  5. बम्बई, शिवाजी पार्क - 18 जनवरी 1948
  6. दिल्ली (गाँधी जी की हत्या के एकदम बाद) - 30 जनवरी 1948
  7. दिल्ली (गाँधी जी की शोक-सभा में) - 2 फरवरी 1948
  8. दिल्ली - 18 फरवरी 1948
  9. पटियाला - 15 जुलाई 1948
  10. नई दिल्ली, इम्पीरियल होटल - 3 अक्तूबर 1948
  11. गुजरात - 12 अक्तूबर 1948
  12. बम्बई, चौपाटी - 30 अक्तूबर 1948
  13. नागपुर - 3 नवम्बर 1948
  14. नागपुर - 4 नवम्बर 1948
  15. दिल्ली - 20 जनवरी 1949
  16. इलाहाबाद - 25 नवम्बर 1948
  17. जयपुर - 17 दिसम्बर 1948
  18. हैदराबाद - 20 फरवरी 1949
  19. हैदराबाद (उस्मानिया युनिवर्सिटी) - 21 फरवरी 1949
  20. मैसूर - 25 फरवरी 1949
  21. अम्बाला - 5 मार्च 1949
  22. जयपुर - 30 मार्च 1949
  23. इन्दौर - 7 मई 1949
  24. दिल्ली - 31 अक्तूबर 1949
  25. बम्बई, चौपाटी - 4 जनवरी 1950
  26. कलकत्ता - 27 जनवरी 1950
  27. दिल्ली - 29 जनवरी 1950
  28. हैदराबाद - 7 अक्तूबर 1950

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