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विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
इसके अलावा, आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए कि रोगी इलाज के दिनों में पैदा
होने वाली सब आकस्मिक घटनाओं का प्रयोग इलाज में बाधा डालने में करता है।
अपने मिलने-जुलने वालों के क्षेत्र में, जिसे भी वह प्रामाणिक मान सकता है,
उसकी ही विरुद्ध राय को, किसी भी आकस्मिक शारीरिक रोग को, या स्नायु-रोग को
उलझाने वाली किसी भी बीमारी को, वह इलाज में बाधा डालने में प्रयुक्त करता
है। सच तो यह है कि वह अपनी दशा में होने वाले प्रत्येक सुधार को भी अपने
प्रयत्न शिथिल करने के लिए एक प्रेरक कारण में परिवर्तित कर लेता है। इसी तरह
आपको उन प्रतिरोधों के रूपों और तरीकों की एक तस्वीर, चाहे वह अधूरी ही हो,
प्राप्त हो गई, जो प्रत्येक विश्लेषण के बीच में आते हैं, और जिन्हें दूर
करना पड़ता है। मैंने इस प्रश्न पर इतने विस्तार से रोशनी इसलिए डाली है
क्योंकि मैं अभी आपको यह बतलाने वाला हूं कि स्नायु-रोगों के बारे में हमारी
गतिकीय अवधारणा हमारे उन प्रतिरोधों के अनुभव पर ही आधारित है, जो
स्नायु-रोगी अपने लक्षणों के इलाज के विरोध में पेश करते हैं। ब्रायर और मैं,
दोनों, पहले सम्मोहन, अर्थात् हिप्नोटिक विधि से मानसिक चिकित्सा का कार्य
करते थे। ब्रायर के पहले रोगी का इलाज सम्मोहनीय आदेशवश्यता1 अर्थात
सम्मोहनावस्था में दिए जाने वाले आदेश की अधीनता की अवस्था में ही किया गया
था। पहले मैंने उसका अनुकरण किया। मैं मानता हूं कि उस समय मेरा कार्य बहुत
आसानी से और मज़े से आगे बढ़ता था, और उसमें समय भी कम लगता था। पर उसके
परिणाम मनमाने और अस्थायी होते थे। इसलिए मैंने अन्त में सम्मोहन छोड़ दिया
और तब मैंने समझा कि इन मनोविकारों की गतिकी को तब तक नहीं समझा जा सकता जब
तक सम्मोहन का प्रयोग होगा। इस अवस्था में प्रतिरोधों का अस्तित्व ही डाक्टर
की नज़र से छिपा रहता है। सम्मोहन प्रतिरोधों को पीछे धकेल देता है और
विश्लेषण कार्य के लिए कुछ क्षेत्र मुक्त कर देता है, पर इस क्षेत्र की
सीमाओं पर उन प्रतिरोधों को रोक देता है, इसलिए वे अजेय रहते हैं। इसका
परिणाम वैसा ही होता है जैसा मनोग्रस्तता-रोगी के सन्देह का। इसलिए यह कहना
उचित होगा कि सच्चा मनोविश्लेषण तभी आरम्भ हुआ, जब सम्मोहन का सहारा छोड़
दिया गया।
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1. Hypnotic suggestibility
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