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मनोविश्लेषण

सिगमंड फ्रायड

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :392
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8838
आईएसबीएन :9788170289968

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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद



व्याख्यान

21

लिबिडो या राग का परिवर्धन और यौन संगठन

मुझे ऐसा लगता है कि यौन वृत्ति के हमारे अवधारण के लिए कामविकृतियों का कितना महत्त्व है। इस बात का मैं आपको पूरा निश्चय नहीं करा सकता, इसलिए जहां तक मुझसे हो सकेगा, वहां तक मैं इस विषय पर प्रस्तुत किए हुए अपने पहले के कथन को फिर से पेश करूंगा और उसमें सुधार करूंगा।

आप यह न समझिए कि सिर्फ काम-विकृतियों के कारण ही हमें यौन वृत्ति या कामुकता के अर्थ में परिवर्तन करना पड़ा, जिसका इतना प्रबल विरोध हुआ है। शैशवीय यौन प्रवृत्ति के अध्ययन से इसके विषय में और भी अधिक बातें पता चली हैं, और इन दोनों का मतैक्य निर्णायक था। परन्तु बचपन के बाद वर्षों में शैशवीय कामुकता के व्यक्त रूप चाहे जितने असंदिग्ध रूप में दिखाई दें, पर प्रारम्भिक वर्षों में वे निश्चित ही इतने अस्पष्ट और हलके होते हैं कि उन्हें निश्चित नाम देना कठिन है। जो लोग विकास की ओर और विश्लेषण द्वारा प्रकाश में लाए गए सम्बन्ध-सूत्रों की ओर ध्यान नहीं देना चाहते, वे उन व्यक्त रूपों के यौन स्वरूप पर आपत्ति उठाएंगे, और फिर उनमें कोई दूसरा स्पष्ट रूप से अलग न किया गया गुण बताएंगे। आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि अब तक हमारे पास किसी घटना के यौन स्वरूप के लिए कोई व्यापक रूप से स्वीकृत कसौटी नहीं है-अब तक हम प्रजनन-कार्य से सम्बन्ध को ही इसकी कसौटी मानते रहे हैं, और इसे हमने अव्याप्ति दोष से दूषित बताकर, अर्थात् बहुत संकुचित कहकर, अस्वीकार कर दिया है। जैविकीय कसौटियां, जैसे डब्ल्यू० फ्लायस द्वारा सुझाई गई तेईस और अट्ठाईस दिनों की आवर्तताएं1 बहुत अधिक विवादास्पद हैं। यौन प्रक्रमों के लिए हम जिन विशिष्ट रासायनिक विशेषताओं की धारणा शायद बना सकें, वे अभी खोजी नहीं जा सकी हैं। दूसरी ओर वयस्कों की काम-विकृतियां काफी सुनिश्चित और असंदिग्ध होती हैं, जैसा कि उनके व्यापक रूप के स्वीकृत वर्णनों से ध्वनित होता है। वे निश्चित ही यौन स्वरूप वाली हैं, चाहे आप उन्हें पतन के चिह्न कहिए या कुछ और; पर इतना हौसला अभी किसी ने नहीं दिखाया कि उन्हें यौन जीवन की घटनाओं में रखने के बजाय किसी और वर्ग में रख दें। सिर्फ उन्हें देखते हुए भी हमारा यह मानना उचित है कि यौन प्रवृत्ति अथवा कामुकता और प्रजनन-कार्य एक बात नहीं है, क्योंकि वे सबकी सब काम-प्रवृत्तियां प्रजनन के उद्देश्य को अस्वीकार करती हैं।

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1. Periodicities

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