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मनोविश्लेषण

सिगमंड फ्रायड

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :392
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8838
आईएसबीएन :9788170289968

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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद


बालकों की यौन दिलचस्पी प्रथमतः जन्म की समस्या के प्रति होती है। थेबन स्फिक्स1 के पीछे भी यही समस्या है। यह कुतूहल अधिकतर दूसरे बालक के आने के अहंकारमूलक भय से पैदा होता है। बालकों को इसका जो यह प्रचलित उत्तर दे दिया जाता है कि चिड़िया बच्चे दे जाती है, उस पर छोटे बालक भी, जितना हम समझते हैं, उससे बहुत अधिक अविश्वास करते हैं। बड़े आदमियों द्वारा ठगे जाने और झूठ द्वारा बहलाए जाने की भावना से उसमें अलग रहने और स्वतन्त्र होने का भाव पैदा होता है। पर बालक आप इस समस्या को हल नहीं कर सकता। उसकी अपरिवर्धित यौन रचना समझने की क्षमता की निश्चित सीमाएं बना देती है। पहले वह यह कल्पना करता है कि भोजन के साथ कोई विशेष वस्तु मिलाकर बालक बनाए जाते हैं। वह यह भी नहीं जानता कि बच्चे सिर्फ स्त्रियों के हो सकते हैं। बाद में उसे इसका पता चलता है और वह भोजन से बच्चे बनाए जाने का विचार छोड देता है. यद्यपि परियों की कहानियों में यह कायम रहता है। कुछ समय बाद वह जल्दी ही यह देख लेता है कि बच्चे बनाने में पिता का अवश्य कुछ कार्य है, पर वह यह नहीं जान पाता कि वह कार्य क्या है। यदि वह अचानक मैथुनकार्य देख ले तो वह यह समझता है कि यह स्त्री को दबाने का यत्न है, जैसे कुश्ती में होता है। सम्भोग का पीड़कतोष वाला अवधारण; पर शुरू में वह इस कार्य का सम्बन्ध बच्चों के सर्जन से नहीं जोड़ता, यदि वह माता के बिस्तर या पेटीकोट पर खून का निशान देख लेता है, तो वह इसे पिता द्वारा पहुंचाई गई चोट का प्रमाण समझता है। कुछ और बड़ा होने पर वह सम्भवतः यह अनुमान करता है कि पुरुष के लिंग का बच्चे पैदा करने में सबसे महत्त्वपूर्ण हिस्सा होता है, पर शरीर के इस अंग का पेशाब करने के अलावा और कोई कार्य वह नहीं समझ सकता।

सभी बच्चे शुरू से यह विश्वास करते हैं कि बच्चे का जन्म आंत में से होता है, अर्थात् शिशु मल की तरह पैदा होता है। यह विचार तभी छूटता है, जब गुदा के क्षेत्र से उसकी सारी दिलचस्पी हटा दी गई हो, और इसके बाद वह यह कल्पना करने लगता है कि नाभि का छिद्र या दोनों स्तनों के बीच के क्षेत्र से बच्चे का जन्म होता है। कुछ-कुछ ऐसे तरीके से कुतूहली बालक यौन वृत्ति सम्बन्धी तथ्यों की कुछ जानकारी हासिल करता है बशर्ते कि वह अज्ञान के कारण गलत रास्ते पर न चला जाए। वह तथ्यों को नज़रन्दाज़ करता रहता है, और अन्त में उसे प्रायः तरुणावस्था से पहले के दिनों में उनका अधूरा और भद्दा वृत्तान्त पता चलता है जिससे उसमें प्रायः उपघातज प्रभाव पैदा होता है।

अब, सम्भवतः आपने सुना होगा कि 'यौन' या 'काम सम्बन्धी' शब्द के अर्थ के मनोविश्लेषण ने अकारण फैलाव कर डाला है, जिससे स्नायु-रोगों के यौन उद्गम और लक्षणों के यौन अर्थ के बारे में इसकी मान्यताएं खड़ी हो सकें। अब आप स्वयं यह फैसला कर सकते हैं कि यह फैलाव उचित है या नहीं। हमने 'यौन-वृत्ति' या 'कामुकता' के अवधारण का अर्थ विस्तृत कर दिया है, पर इतना ही विस्तृत किया है कि इससे विकृत व्यक्तियों और बालकों के यौन जीवन को इसके अन्तर्गत लाया जा सके, अर्थात् हमने इसे इसके अर्थ का सही दायरा फिर प्राप्त करा दिया। मनोविश्लेषण के बाहर जिस चीज़ को यौन वृत्ति या कामुकता कहा जाता है, वह सिर्फ उस सीमित यौन जीवन पर लागू होती है जो प्रजनन-कार्य के लिए प्रयुक्त होता है, और प्रकृत कहलाता है।

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1.स्फिकस ग्रीक पौराणिक कथाओं का एक दानव है। वह यात्रियों से पहेलियां पछता था और जो उन्हें हल नहीं कर पाते थे, उनका गला घोंट देता था।
-अनुवादक

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