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मनोविश्लेषण

सिगमंड फ्रायड

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :392
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8838
आईएसबीएन :9788170289968

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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद


जैसा कि आप देखते हैं, मैंने लड़के के अपने पिता और माता के सम्बन्ध का ही वर्णन किया है। आवश्यक उलट-फेर के साथ ठीक यही बात छोटी लड़कियों में चलती है। पिता से प्रेमपूर्ण अनुराग, अनावश्यक माता को हटाने और उसका स्थान ग्रहण करने की आवश्यकता, तरुणावस्था में होने वाले हाव-भावों और लीला का शुरू में ही प्रदर्शन-ये सब बातें मिलकर छोटी लड़की का विशेष रूप से मोहक चित्र बना देती हैं, और हम इसकी गम्भीरता और इस स्थिति से बाद में पैदा हो सकने वाले गम्भीर परिणामों को भूल जाते हैं। यह बात और कह दी जाए कि बहुत बार बालक में ईडिपस ग्रन्थि पैदा करने में स्वयं माता-पिता का ही सबसे निश्चायक प्रभाव पड़ता है। वे स्वयं, एक से अधिक बालक होने पर, लिंग-आकर्षण से प्रभावित होते हैं-पिता अपनी छोटी लड़की के प्रति असंदिग्ध रूप में प्यार प्रदर्शित करता है और माता पुत्र के प्रति; पर इस बात से भी शैशवीय ईडिपस ग्रन्थि की स्वयंस्फूर्तता पर गम्भीर आक्षेप नहीं आता। जब और बच्चे हो जाते हैं, तब ईडिपस ग्रन्थि विस्तृत हो जाती है, और वह परिवार-ग्रन्थि बन जाती है। अहंकारमूलक दिलचस्पियों को लगने वाले आघात से नया बल पाकर यह इन नये बच्चों के प्रति अरुचि की भावना और फिर उनसे छुटकारा पाने की निःसंकोच इच्छा पैदा करती है। ये घृणा की भावनाएं साधारणतया जनकीय ग्रन्थि1 से सम्बन्धित घृणा-भावनाओं की अपेक्षा अधिक खुलेआम प्रकट की जाती हैं। यदि यह इच्छा पूरी हो जाए और कुछ समय बाद परिवार में अनचाही वृद्धि मृत्यु के कारण हट जाए, तो बाद के विश्लेषण से पता चलेगा कि बालक के लिए इस मृत्यु का भी कितना अर्थ था; यद्यपि यह आवश्यक नहीं कि इसकी याद उसे बनी रहे। दूसरे शिशु के पैदा हो जाने के कारण पहले बालक को मजबूरन दूसरे स्थान पर हटना पड़ता है, और अब पहली बार वह माता से प्रायः पूरी तरह अलग हो जाता है। इसलिए इस तरह अपने अलग कर दिए जाने को माफ कर देना उसके लिए बड़ा कठिन है। उसमें वैसी ही भावनाएं पैदा हो जाती हैं जिन्हें वयस्कों में हम ‘गहरी कटुता की भावना' कहते हैं, और प्रायः वे अस्थायी वैमनस्य का आधार बन जाती हैं। यह पहले ही बताया जा चुका है कि यौन कुतूहल और इसके बाद की सब बातों का प्रायः इन अनुभवों से सम्बन्ध होता है। जब ये नये भाई और बहन बड़े होते हैं तब उनके प्रति बालक के रुख में बहुत महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हो जाते हैं। लड़का अपनी निष्ठाहीन माता के स्थान पर अपनी बहन को प्रेम-आलम्बन बना सकता है। जहां एक छोटी बहन को आकृष्ट करने वाले कई भाई होते हैं, वहां बालकपन में ही विरोधपूर्ण प्रतिस्पर्धा पैदा हो जाती है, जो बाद के जीवन में बड़े महत्त्व की सिद्ध होती है। छोटी लड़की अपने से बड़े भाई को पिता का स्थानापन्न बना लेती है, क्योंकि पिता अब उससे बचपन के जैसा प्यार नहीं करता, या यह किसी छोटी बहन को उस शिशु का स्थानापन्न बना लेती है जो वह अपने पिता से पाना चाहती थी, पर न पा सकी।

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1. Parental complex

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