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विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
अब हमारे लिए वह चिकित्सा-सम्बन्धी तथ्य सबसे अधिक व्यावहारिक महत्त्व का
होता जाता है जो विश्लेषण द्वारा सिद्ध ईडिपस ग्रन्थि के रूप के पीछे से
हमारे सामने आता है। हमें पता चलता है कि प्रौढ़ता के समय जब यौन
निसर्ग-वृत्ति सबसे पहले अपनी आवश्यकताएं पूरी ताकत से पेश करती हैं, तब
पुरानी परिचित निषिद्ध सम्भोगात्मक वस्तु राग या लिबिडो से ढके हुए रूप में
पुनर्ग्रहण की जाती है, मानो शैशव काल का आलम्बन-चुनाव खेल में किया गया एक
विनोदात्मक यत्न था, पर इसने प्रौढ़ता के आलम्बन-चुनाव के लिए दिशा निश्चित
कर दी। इस समय ईडिपस ग्रन्थि की दिशा में या इसके विरोध में भावना का बड़ा
तीव्र प्रवाह सक्रिय हो जाता है, पर क्योंकि उन भावनाओं की मानसिक
पूर्वावस्थाएं असह्य हो गई हैं, इसलिए ये भावनाएं अधिकांशतः चेतन के बाहर ही
रहती हैं। प्रौढ़ता या तरुणावस्था के समय से मनुष्य को जनकों से अपने आपको
स्वतन्त्र करने के भारी काम में लगाना पड़ता है, इस आसक्ति को छोड़ देने के
बाद ही उसका बालकपन खत्म हो सकता है, और इस प्रकार वह सामाजिक समुदाय का
सदस्य बन सकता है। पुत्र के लिए यह कार्य है कि वह अपनी रागात्मक अभिलाषाओं
को अपनी माता से हटा ले, जिससे वह उसका उपयोग यथार्थ रूप में एक बाहरी
प्रेम-आलम्बन की खोज में कर सके; और दूसरे, यदि वह अपने पिता का विरोधी रहा
है, तो उसके साथ मेल कर ले, या यदि शैशवकाल के विद्रोह की प्रतिक्रिया के रूप
में वह उसके अधीन हो गया है, या उसका साधन-मात्र बन गया, तो उसके आधिपत्य से
अपने को मुक्त कर ले। ये कार्य प्रत्येक पुरुष के लिए हैं, पर यह बात ध्यान
देने योग्य है कि वे आदर्श रूप में बहुत कम उदाहरणों में पूर्ण किए जाते हैं
अर्थात् ऐसा बहुत कम होता है कि वे मनोवैज्ञानिक और सामाजिक दृष्टि से
सन्तोषजनक रीति से हल हो जाएं। पर स्नायु-रोगियों में जनकों से यह अलगाव
बिलकुल भी नहीं हो पाता। पुत्र सारे जीवन अपने पिता की अधीनता में रहता है,
और अपने राग को किसी नये यौन आलम्बन पर स्थानान्तरित करने में असमर्थ होता
है। इससे उलटे सम्बन्ध में यही अवस्था पुत्री की होती है। इस ग्रन्थ में
ईडिपस ग्रन्थि को स्नायु-रोगों का साररूप समझना उचित ही है।
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1. Retroversion
2. Retrogressive
3. Nucleus
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