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मनोविश्लेषण

सिगमंड फ्रायड

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :392
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8838
आईएसबीएन :9788170289968

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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद


आप कल्पना कर सकते हैं कि मैं ईडिपस ग्रन्थि के साथ सम्बद्ध बहुत सारे सम्बन्ध-सूत्रों की, जो व्यवहार और सिद्धान्त की दृष्टि से बड़े महत्त्व के हैं, कितनी अधूरी रूपरेखा दे रहा हूं। मैं इसके परिणमनों1 (या विभिन्न रूपों) और सम्भव अपवर्तनों की ज़रा भी चर्चा नहीं करूंगा। इसके ज़रा दूर के परिणमनों में से सिर्फ एक ही चर्चा करना चाहता हूं, जिससे यह सिद्ध होता है कि इसने साहित्य-सृजन को बहुत ही अधिक प्रभावित किया है। ओटो रैंक ने एक बहुत मूल्यवान गवेषण कार्य में यह दिखाया है कि सब युगों के नाटक लेखकों ने अपनी सामग्री मुख्यतः ईडिपस तथा निषिद्ध सम्भोग-ग्रन्थि और इसके परिणमनों तथा छिपे हुए रूपों से ली है। यह कह देना भी उचित होगा कि मनोविश्लेषण के समय से बहुत पहले ईडिपस के दोनों दण्डनीय अपराध असंयत निसर्ग-वृत्ति की सच्ची अभिव्यक्तियां माने जाते थे। एन्साइक्लोपीडिया-लेखक डिडेरी की प्रतियों में आपको वह प्रसिद्ध संवाद ल नेव्यू द रामो (Le neveu de Rameau) मिलेगा, जिसका गेटे जैसे साहित्यकार ने जर्मन भाषा में अनुवाद किया था। उसमें आपको ये विलक्षण शब्द पढ़ने को मिलेंगे, 'यदि इस छोटे-से जंगली का बल चले, यदि उसकी विमूढ़ता प्रतिरूप में मौजूद हो, और यदि उसमें दुधमुंहे बच्चे जितनी भी समझ हो और साथ ही तीस वर्ष के युवक के बराबर प्रबल वासनावेश भी हो, तो वह अपने पिता की गर्दन मरोड़ देगा और अपनी माता से सम्भोग करेगा।'

एक चीज़ और है जिसे मैं नहीं छोड़ सकता। ईडिपस की माता-पत्नी से हमें स्वप्नों का स्मरण आएगा। क्या आपको स्वप्न-विश्लेषणों के परिणाम अभी याद हैं? किस तरह स्वप्न-निर्माण करने वाली इच्छाएं प्रायः विकृत और निषिद्ध-सम्भोगात्मक सिद्ध हुई थीं या उनमें निकट के और प्रिय सम्बन्धियों के प्रति अनाशंकित शत्रुता दिखाई दी थी? तब हमने भावना के इन दूषित प्रयत्नों के स्रोत को बिना व्याख्या किए छोड़ दिया था। अब आप स्वयं इस प्रश्न का उत्तर दे सकते हैं। वे राग या लिबिडो के विन्यास1 और आलम्बनों पर राग का आच्छादन2 हैं, जो बिलकुल बचपन के काल से सम्बन्ध रखते हैं, और बहुत समय से चतन जीवन में त्यागे जा चुके हैं; पर जो रात में अब भी अपनी मौजूदगी सिद्ध कर देते हैं, और एक अर्थ में, कार्य करने में समर्थ हैं। पर क्योंकि इस तरह विकृत निषिद्ध सम्भोगात्मक हत्या वाले स्वप्न सब लोगों को आते हैं, और सिर्फ स्नायु-रोगियों को नहीं आते, इसलिए हम यह अनुमान कर सकते हैं कि जो लोग ओज प्रकृत हैं, वे ईडिपस ग्रन्थि की विकृतियों और आलम्बन-आच्छादनों में से गुज़र चुके हैं, और यह ही प्रकृत परिवर्धन का रास्ता है। इतनी ही बात है कि जो चीज़ हमें प्रकृत लोगों के स्वप्न-विश्लेषणों में भी प्रकट होती दिखाई देती है, वह स्नायु-रोगियों में बड़े अतिरंजित रूप में होती है, और यह भी एक कारण है जिससे हमने स्नायविक लक्षणों पर विचार करने से पहले स्वप्नों का अध्ययन करना उचित समझा था।

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1. Variations
2. Inversions
3. Dispositions
4. Investments

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