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मनोविश्लेषण

सिगमंड फ्रायड

प्रकाशक : राजपाल एंड सन्स प्रकाशित वर्ष : 2011
पृष्ठ :392
मुखपृष्ठ : पेपरबैक
पुस्तक क्रमांक : 8838
आईएसबीएन :9788170289968

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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद


अतिमूल्यांकन (यौन आलम्बन को बहुत अच्छा मानने) में दिखाई देता है। यदि इसमें आलम्बन के प्रति प्रेषित और प्रेमी के अहंकार से उत्पन्न परार्थ को भी जोड़ दिया जाए तो यौन आलम्बन सर्वोच्च हो जाता है। इसने अहम् को पूरी तरह निगल लिया है।

मैं समझता हूं कि इन शुष्क वैज्ञानिक कल्पनाओं से आप बोझ अनुभव कर रहे होंगे। इसलिए स्वरति की अवस्था और पूर्ण तीव्र प्रेम के 'आर्थिक' वैषम्य का एक कवि-वर्णन आपके सामने पेश करता हूं। यह मैं गेटे के वैस्टोस्ट्लख डीवन (Westostliche Divan) में जुलेखा और उसके प्रेमी में हुए संवाद से ले रहा हूं :

जुलेखा

सब सहमत हैं, हों वे विश्वविजेता,
दास, या कि जन-साधारण,

अपने आपे का रहना ही है धरती का सुख सच्चा
इसके रहने पर सब जीवन ग्राह्य, और
इसको रखने को हैं सभी त्याग स्वीकार्य।

हातिम

कहते तो हैं! और ठीक ही कहते होंगे!
पर धरती का सारा सुख,
है मिला मुझे एकत्र जुलेखा में!
वह अपने को मुझपर करती खर्च
कि जिससे मैं बनता हूं मैं;
हटती यदि वह दूर, नहीं
मुझको अपना आपा ढूंढ़े मिलता,
और खतम हातिम हो जाता;
पर यदि वह बन जाए किसी
सौभाग्यवान् की हृदय-हार
तो हातिम झट आ जाएगा
उसी हृदय की धड़कन बन कर।1

दूसरी बात है स्वप्नों के सिद्धान्त के अधिक विस्तार की। स्वप्न किस तरह पैदा होता है, इसकी तब तक व्याख्या नहीं हो सकती जब तक हम यह न मानें कि जिसे दमन करके अचेतन में भेज दिया है वह अहम् से कुछ स्वतन्त्र हो गया है; इसलिए यह सोने की इच्छा के अधीन नहीं रहता और अपने आच्छादनों को कायम रखता है, हालांकि अहम् से पैदा होने वाले सब आलम्बन-आच्छादन नींद-प्रयोजन के लिए पीछे खींच लिए गए हैं। इससे ही हम यह समझ सकते हैं कि यह अचेतन सामग्री रात में सेन्सरशिप की क्रियाओं के निराकरण या कमी का कैसे उपयोग कर सकती है और यह जानती है कि दिन की बची हुई स्मृतियों से प्रतिषिद्ध स्वप्न-इच्छा का किस तरह निर्माण किया जाए। दूसरी ओर, सोने की इच्छा और इसके द्वारा प्रेरित राग के प्रत्याहरण या वापस खींच लेने के विरुद्ध जो प्रतिरोध होता है उसका जन्म इस अवशेष और दमित अचेतन सामग्री के बीच पहले से मौजूद साहचर्य से हो सकता है। इसलिए यह महत्त्वपूर्ण गतिकीय कारक को भी अब स्वप्न-रचना के उस अवधारण में समाविष्ट कर लेना चाहिए, जो हमने पहले बनाया था।

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1. अर्नेस्ट डाउडन के अंग्रेज़ी अनुवाद का हिन्दी रूपान्तर

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