|
विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
|
286 पाठक हैं |
||||||
‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
आप पूछेगे कि ऐसा कब होता है कि स्वप्न की इच्छा सेन्सरशिप को हटाने में
समर्थ हो जाती है। यह इच्छा पर या सेन्सरशिप पर निर्भर है। हो सकता है कि
कभी-कभी अज्ञात कारणों से इच्छा की प्रबलता बहुत अधिक हो जाती हो, पर हमारी
धारणा यह है कि शक्ति-सन्तुलन में यह परिवर्तन होने का कारण प्रायः सेन्सरशिप
का रुख ही होता है। हम पहले जान चुके हैं कि सेन्सरशिप की तीव्रता प्रत्येक
उदाहरण में अलग-अलग होती है और वह विभिन्न अवयवों से विभिन्न प्रकार की सख्ती
बरतती है। अब हम इतनी बात और कहना चाहते हैं कि इसका साधारण व्यवहार भी बहुत
बदलने वाला होता है, और यह उसी अवयव के प्रति भी सदा एक समान कठोर नहीं दिखाई
देती। तब यदि ऐसा हो कि सेन्सरशिप किसी स्वप्न-इच्छा के विरुद्ध, जो इसे
उखाड़ फेंकने को तैयार है, अपने-आपको शक्तिहीन अनुभव करती है तो वह विपर्यास
का उपयोग करने के बजाय अपना आखिरी हथियार काम में लाती है, और चिन्ता पैदा
करके नींद को नष्ट कर देती है।
यहां आकर हमें महसूस होता है कि अब भी हमारे पास इस विषय में कोई धारणा नहीं
कि ये दुष्ट, अस्वीकृत इच्छाएं रात के समय ही क्यों उभर आती हैं. और हमें
नींद में परेशान करती हैं। इसका उत्तर एक और परिकल्पना द्वारा ही दिया जा
सकता है, जो नींद के स्वरूप पर प्रकाश डालती है। दिन के समय इन इच्छाओं पर
सेन्सरशिप का भारी बोझ पड़ता है और साधारणतया यह असम्भव होता है कि वे
अपने-आपको जरा भी अनभव करा सकें। पर रात में यह सम्भावना है कि मानसिक जीवन
की और सब चेष्टाओं की तरह यह सेन्सरशिप निलम्बित' अर्थात् क्रियाहीन, या बहुत
ही कमजोर हो जाती हो और नींद की एकमात्र इच्छा ही व्यापक हो जाती हो। इस
प्रकार, रात के समय सेन्सरशिप की इस आंशिक निष्क्रियता के कारण ही निषिद्ध
इच्छाएं फिर सक्रिय हो सकती हैं। इनसोमनिया अर्थात् निद्राहीनता रोग से
पीड़ित स्नायु वाले लोग यह स्वीकार करते हैं कि शुरू में उनकी निद्राहीनता
अपनी इच्छा के अधीन थी; कारण यह कि उन्हें सोने की हिम्मत नहीं पड़ती थी
क्योंकि वे अपने स्वप्नों से डरते थे-आशय यह हुआ कि वे सेन्सरशिप की कम
जागरूकता के परिणामों से डरते थे। आपको यह समझने में कोई कठिनाई नहीं होगी कि
सेन्सरशिप की यह कमी घोर असावधानी का पक्षपोषण नहीं करती। नींद हमारे
मोटर-कार्यों2 को कमजोर कर देती हैं। यदि हमारे दुष्ट आशय हमारे भीतर हलचल
शुरू कर दें, तो भी वे अधिक-से-अधिक इतना ही कर सकते हैं कि एक स्वप्न पैदा
कर दें जो सव व्यावहारिक प्रयोजनों की दृष्टि से हानिरहित होता है, और इस
आराम देने वाली परिस्थिति के कारण ही सोने वाला यह कह दिया करता है-यह तो सच
है कि वह रात में यह वात कहता है पर यह उसके स्वप्न-जीवन का हिस्सा नहीं
होती- 'यह तो सिर्फ स्वप्न है।' इस प्रकार हम इसे चलने देते हैं और सोना जारी
रखते हैं।
------------------------
1. Suspended
2. Motor-functions
|
|||||








