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विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
3. मैं आसानी से कल्पना कर सकता हूं कि यह बात सुनकर आप विशेष प्रभावित होंगे
कि जिन लोगों ने मनोविश्लेषक के रूप में बहुत समय तक स्वप्नों के निर्वचन का
अध्ययन किया है, उन्होंने भी हमारी स्वप्नों की अवधारणा पर आक्षेप किए हैं।
नई गलतियों के ऐसे अच्छे मौके को कैसे छोड़ दिया जाता? इसलिए विचारों में
विभ्रम के कारण और अनचित सामान्यकरण के आधार पर ऐसी बातें कही गई हैं, जो
स्वप्नों की डाक्टरी अवधारणा से कम गलत नहीं हैं। इनमें से एक बात आप पहले
सुन चुके हैं कि स्वप्न उस समय की परिस्थिति के अनुकूल बनने की कोशिशों और
भविष्य की समस्याओं के हल को प्रकट करते हैं। दूसरे शब्दों में वे
'भविष्यलक्षी प्रवृत्ति' या लक्ष्य की ओर चलते हैं (ए० मीडर)। हम पहले यह
दिखा चके हैं कि इस कथन का आधार स्वप्न तथा गुप्त स्वप्न-विचार को ठीक-ठीक
अलग न कर सकना है और इसमें स्वप्नतन्त्र को नज़रन्दाज़ कर दिया गया है। जो
लोग इस 'भविष्यलक्षी प्रवृत्ति' की बात कहते हैं, यदि उससे उनका आशय उस अचेतन
मानसिक व्यापार से है जिसमें गुप्त विचार होते हैं, तो एक ओर तो इनमें कोई नई
बात नहीं है, और दूसरी ओर, यह पूरा वर्णन नहीं है, क्योंकि अचेतन मानसिक
व्यापार भविष्य के लिए तैयारी करने के अलावा और बहुत-से कामों में लगा रहता
है। इस कथन में तो और भी विभ्रम दिखाई देता है कि प्रत्येक स्वप्न की तह में
'मृत्यु-संकेत' देखा जा सकता है। मुझे यह बात अच्छी तरह समझ में नहीं आई कि
इस कथन का क्या आशय है, पर यह सन्देह होता है कि इसकी आड़ में स्वप्न तथा
स्वप्नद्रष्टा के सारे व्यक्तित्व को एक जगह मिलाकर घुटाला कर दिया गया है।
थोड़े-से प्रभावोत्पादक उदाहरणों के आधार पर किया गया एक अनुचित सामान्यकरण
इस कथन में मौजूद है कि प्रत्येक स्वप्न के दो तरह के निर्वचन हो सकते हैं-एक
उस तरह का जिस तरह का हमने बताया है, अर्थात् तथाकथित 'मनोविश्लेषणात्मक'
निर्वचन, और दूसरा तथाकथित 'रहस्यवादी'1 निवर्चन, जो नैसर्गिक प्रवृत्तियों
की उपेक्षा करता है और ऊंचे मानसिक कार्यों के निरूपण का लक्ष्य रखता है (एच०
सिल्वरर)। इस तरह के कुछ स्वप्न होते हैं, पर इस अवधारणा में बहुसंख्यक
स्वप्न भी नहीं आ सकते। जो कुछ आप सुन चुके हैं, उसके बाद यह कथन कि सब
स्वप्नों का निर्वचन द्विलिंगित1 अर्थात् दो प्रवृत्तियों के जिनमें से एक
पुरुष और दूसरी स्त्री है-मेल के रूप में किया जा सकता है (ए० एडलर), आपको
बिलकुल बेतुका जंचेगा। इस तरह के स्वप्न होते अवश्य हैं। और आगे चलकर आपको
पता चलेगा कि उनका ढांचा कुछ हिस्टीरिया के लक्षणों वाले ढांचे जैसा ही है।
स्वप्नों की नई सामान्य विशेषताओं की इन सब खोजों की चर्चा करके मैं आपको
उनके विरुद्ध चेतावनी देना चाहता हूं या कम-से-कम उनके विषय में अपनी राय
आपके सामने स्पष्ट कर देना चाहता हूं।
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1. Anagogc
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