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विविध >> मनोविश्लेषण मनोविश्लेषणसिगमंड फ्रायड
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‘ए जनरल इन्ट्रोडक्शन टु साइको-अनालिसिस’ का पूर्ण और प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद
मैं स्वप्नों की समस्याओं के बारे में आपको इतना ही बताना चाहता था। आप समझ
रहे होंगे कि मैंने बहुत बड़े क्षेत्र को पार किया है, और यह भी देख लिया
होगा कि प्रायः प्रत्येक बात पर मेरा विवेचन अधूरा रहा है, जैसा कि अनिवार्य
ही था। पर इसका कारण यह है कि स्वप्नों की घटनाएं स्नायुरोगों की घटनाओं से
बहुत नज़दीकी सम्बन्ध रखती हैं। हमारी योजना यही थी कि स्नायुरोगों के अध्ययन
की भूमिका के रूप में स्वप्नों का अध्ययन किया जाए, और स्नायु-रोगों पर विचार
करने के बाद स्वप्नों पर विचार करने की अपेक्षा यह तरीका निश्चित रूप से
अच्छा था। परन्तु क्योंकि स्वप्न हमें स्नायुरोगों को समझने के लिए तैयार
करते हैं, इसलिए स्वप्नों के बारे में सही धारणा भी तभी हो सकती है, जब
स्नायुरोगों के रूपों का कुछ ज्ञान हमें हो।
मैं नहीं जानता कि आप इसके बारे में क्या सोचेंगे पर मैं आपको विश्वास दिलाता
हूं कि आपकी इतनी दिलचस्पी और समय स्वप्न सम्बन्धी समस्याओं पर लगा देने का
मुझे कोई भी अफसोस नहीं। उन कथनों की, जो मनोविश्लेषण के आधारभूत सिद्धान्त
हैं, सचाई का इतना जल्दी निश्चय कराने का कोई और तरीका मुझे नहीं आता। यह
स्पष्ट करने के लिए कि स्नायुरोगी के लक्षणों का कुछ अर्थ होता है, वे कोई
प्रयोजन सिद्ध करते हैं, और रोगी के जीवन सम्बन्धी अनुभवों से पैदा होते हैं,
महीनों, बल्कि वर्षों कठिन परिश्रम की आवश्यकता है। दूसरी ओर ये चीजें किसी
स्वप्न में, जो पहले बिलकुल गड़बड़ और समझ में न आने वाला दिखाई देता था,
दिखाने के लिए कुछ ही घण्टों की मेहनत काफी है, और इस तरह उन सब आधारों की
पुष्टि हो जाती है जिन पर मनोविश्लेषण खड़ा है-अर्थात् अचेतन मानसिक
प्रक्रमों का अस्तित्व, उनको चलाने वाले विशेष तन्त्र, और उनसे अभिव्यक्त
होने वाले निसर्ग-वृत्तियों के प्रेरक बल। और जब हम देखते हैं कि स्वप्नों के
ढांचे और स्नायुरोगों के ढांचे में कितना सादृश्य है, तथा सोचते हैं कि
स्वप्नद्रष्टा कितनी जल्दी अच्छी तरह सजग और तर्कसंगत मनुष्य बन जाता है, तब
हमें यह निश्चय हो जाता है कि स्नायुरोग भी मानसिक जीवन में क्रियाशील बलों
के संतुलन में होने वाले परिवर्तन पर निर्भर हैं।
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