लोगों की राय

लेखक:

वीर भारत तलवार

जन्म : 20 सितम्बर, 1947, जमशेदपुर (झारखण्ड)

शिक्षा : बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से एम.ए. (हिन्दी)। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से पीएच.डी.। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में दो बार फ़ेलो। जे.एन.यू. में 24 वर्ष अध्यापन।

1970 के दशक वामपन्थी आन्दोलन में पूर्णकालिक कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय। अलग झारखण्ड राज्य आन्दोलन के सिद्धान्तकारों में एक। तीन पत्रिकाओं-पटना से फिलहाल (1972-74), धनबाद से शालपत्र (1977-78) और रॉँची से झारखण्ड वार्ता (1977-78) का सम्पादन-प्रकाशन। आदिवासी इलाकों में बड़े बाँधों के विकल्प पर शोध तथा राँची विश्वविद्यालय में आदिवासी भाषाओं का विभाग खुलवाने में विशेष भूमिका।

प्रकाशन : किसान; राष्ट्रीय आन्दोलन और प्रेमचन्द : 1918-22 राष्ट्रीय आन्दोलन और साहित्य, रस्साकशी; सामना (सभी वाणी प्रकाशन, नयी दिल्‍ली)। झारखण्ड को आदिवासियों के बीच, भारतीय ज्ञानपीठ। हिन्दू नवजागरण की विचारधारा : सत्यार्थ प्रकाश, गजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द : प्रतिनिधि संकलन (सम्पादन), राजा शिवप्रसाद सितारेहिन्द (मोनोग्राफ), नक्सलबाड़ी के दौर में (सम्पादन), झारखण्ड आन्दोलन के दस्तावेज खण्ड 1,2 और झारखण्ड में मेरे समकालीन।

सम्मान : झारखण्ड के आदिवासियों द्वारा दिया ‘भगवान बिरसा पुरस्कार’ (1988-89) तथा ‘झारखण्ड रत्न’ की उपाधि से विभूषित (2003)।

किसान राष्ट्रीय आंदोलन और प्रेमचन्द्र : 1918-22

वीर भारत तलवार

मूल्य: $ 15.95

"अवध के किसान आंदोलन का इतिहास और साहित्यिक चेतना का संगम।"

  आगे...

झारखंड के आदिवासियों के बीच

वीर भारत तलवार

मूल्य: $ 24.95

"झारखंड के आदिवासी जीवन का प्रामाणिक दर्पण और आंदोलन का जीवंत दस्तावेज़।"

  आगे...

बगावत और वफादारी : नवजागरण के इर्द-गिर्द

वीर भारत तलवार

मूल्य: $ 15.95

"19वीं सदी के धार्मिक नवजागरण की उलझनों और विभाजनों का बेबाक विश्लेषण।"

  आगे...

रस्साकशी

वीर भारत तलवार

मूल्य: $ 13.95

"19वीं सदी के भारतीय नवजागरण और आज की साम्प्रदायिक प्रवृत्तियों का विश्लेषण।"

  आगे...

राष्ट्रीय आन्दोलन और साहित्य

वीर भारत तलवार

मूल्य: $ 16.95

"राष्ट्रीय आंदोलन और साम्प्रदायिकता के बीच संघर्ष : प्रेमचन्द और गणेश शंकर विद्यार्थी का दृष्टिकोण।"

  आगे...

सामना

वीर भारत तलवार

मूल्य: $ 16.95

"वीर भारत तलवार की आलोचना : गहरे विश्लेषण से साहित्य की नई राह तक।"

  आगे...

 

   6 पुस्तकें हैं|