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इतिहास और राजनीति >> ताजमहल मन्दिर भवन है ताजमहल मन्दिर भवन हैपुरुषोत्तम नागेश ओक
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पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...
ताजमहल कदाचित् प्राचीन हिन्दू नगर का केन्द्रीय मन्दिर तेज-महा-आलय होगा इसकी पुष्टि कीन की पुस्तक (हैंडबुक) के पृष्ठ १७९ पर होती है। वह कहता है-"अकबर से भी शताब्दियों पूर्व प्राचीन आगरा नगर की दीवार पर ताजगंज (नामक स्थान पर) एक कलन्दर दरवाजा था, जिसे उस दीवार का प्रवेश- द्वार माना जाता है।" यह विवरण हमारे इस कथन की पुष्टि करता है कि ताजमहल के आसपास का क्षेत्र आगरा नगर का अत्यन्त प्राचीन भाग है। आगरा के इस भाग में अपना शिव मन्दिर था जो तेज-महा-आलय कहलाता था। जैसा कि प्राचीन तथा मध्ययुगीन भारत में प्रचलित था, यह मंदिर नगर की दीवार से सटा हुआ था। वास्तव में कलन्दर दरवाजा किसी संस्कृत नाम का मुस्लिम अपभ्रंश है जो या तो किसी और द्वार का या फिर, जो आज ताजगंज दरवाजा कहलाता है, जो ताजमहल की ओर जाता है उसका ही नाम है। वास्तव में हमारी दृष्टि में प्राचीन समय से ही प्रमुख प्रवेश ताजंगज द्वार से ही होता था। यह विशाल कोष्ठ-द्वार वहाँ अभी विद्यमान है।
ताजमहल की ही भांति असंख्य प्राचीन और मध्ययुगीन भारत के हिन्दू भवन मुसलमानों के अधिकार में होने के कारण उन्हें मूल रूप से मुस्लिम निर्मित मकबरे, मस्जिद और दुर्ग बतलाया गया तथा उन पर झूठी नक्काशी की गई। इस कपटजाल का अनजाने में ही अमेरिकन पर्यटक बेयर्ड टेलर द्वारा पर्दाफाश हो गया। कीन की पुस्तक (हैंडबुक) के पृष्ठ १७७ पर उसका उद्धरण उल्लिखित है। टेलर कहता है-"मुझे केवल एक इसी तथ्य से आश्चर्य होता है कि जहाँ मुसलमानी साम्राज्य का केन्द्र था वहाँ तो मुस्लिम कला कहीं-कहीं-वह भी बहुत कम मात्रा में दिखाई देती है, किन्तु इसके विपरीत और बहुत दूर सीमान्तों पर (अर्थात् स्पेन और भारत में) वह बड़ी तीव्रता से अपने चरम उत्सर्ग पर पहुंच गई है।"
टेलर महोदय जो कहना चाहते हैं उसका अभिप्राय है कि स्पेन और भारत जैसे दूरस्थ देशों में मुस्लिम आक्रमणकारियों ने प्रत्यक्षतः विशाल एवं भव्य स्मारक बनवाए किन्तु सीरिया, इराक और अरब जैसे अपने ही देशों में वे इस प्रकार की कला का बहुत ही कम प्रदर्शन कर पाए।
हमें टेलर और तत्सम सभी सरलहृदय व्यक्तियों पर दया आती है। उन्हें बुरी तरह से धोखा दिया गया है। स्पेन और भारत जैसे देशों में जिन भवनों के विषय में उन्हें विश्वास करने को कहा जाता है कि वे मुस्लिम भवन हैं, वे किंचिन्मात्र भी मुस्लिम संरचनाएँ नहीं हैं। वे सभी एतद्देशीय शासकों द्वारा मुसलमानी शासन से पूर्व बनवाए गए भवन हैं जो कि आक्रमण के समय हथिया लिये गए थे। उन्हें मुसलमान विजेताओं ने केवल अपनी इच्छानुसार तोड़ा-मरोड़ा और आडम्बरयुक्त आवरणों तथा झूठे इतिहासों के माध्यम से उन्हें कपटपूर्ण इस्लामी निर्माण कहकर प्रस्तुत किया। हमारी यह खोज स्पेन को उसके प्राचीन भवनों को मुसलमानी न मानने में सहायक होगी।
सूचना के रूप में हम इतना और कहना चाहेंगे कि दिल्ली की तथाकथित कुतुबमीनार से ताजमहल कुछ थोड़ा ऊंचा है। अपनी पुस्तक के पृष्ठ १७४ पर कीन लिखता है कि मुख्य गुम्बद के उद्यान के समतल तथा त्रिशूल कलश शिखर की दूरी (ऊँचाई) २४३.५ फुट है जबकि दिल्ली की तथाकथित कुतुबमीनार २३८ फुट और एक इंच है। क्योंकि पर्यटक ताजमहल के त्रिशूल कलश शिखर तक पहुंचने में असमर्थ रहते हैं और वे उससे बहुत नीचे होते हैं इसलिए वे उसकी कलशयुक्त शिखर तक की पूर्ण ऊंचाई समझने में असमर्थ रहते हैं।
मुख्य गुम्बद के शिखर लौह छड़ पर प्रारम्भ में भवन का जीर्णोद्धार करने वाले कुछ व्यक्तियों के नाम खुदे हुए हैं।" कतिपय अंग्रेजों के नाम सहित।
इस प्रकार लौह छड़ पर भी शाहजहाँ की ओर से किसी प्रकार का दावा अंकित नहीं है।
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- प्राक्कथन
- पूर्ववृत्त के पुनर्परीक्षण की आवश्यकता
- शाहजहाँ के बादशाहनामे को स्वीकारोक्ति
- टैवर्नियर का साक्ष्य
- औरंगजेब का पत्र तथा सद्य:सम्पन्न उत्खनन
- पीटर मुण्डी का साक्ष्य
- शाहजहाँ-सम्बन्धी गल्पों का ताजा उदाहरण
- एक अन्य भ्रान्त विवरण
- विश्व ज्ञान-कोश के उदाहरण
- बादशाहनामे का विवेचन
- ताजमहल की निर्माण-अवधि
- ताजमहल की लागत
- ताजमहल के आकार-प्रकार का निर्माता कौन?
- ताजमहल का निर्माण हिन्दू वास्तुशिल्प के अनुसार
- शाहजहाँ भावुकता-शून्य था
- शाहजहाँ का शासनकाल न स्वर्णिम न शान्तिमय
- बाबर ताजमहल में रहा था
- मध्ययुगीन मुस्लिम इतिहास का असत्य
- ताज की रानी
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- उत्कीर्ण शिला-लेख
- ताजमहल सम्भावित मन्दिर प्रासाद
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- दन्तकथा की असंगतियाँ
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