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इतिहास और राजनीति >> ताजमहल मन्दिर भवन है ताजमहल मन्दिर भवन हैपुरुषोत्तम नागेश ओक
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पी एन ओक की शोघपूर्ण रचना जिसने इतिहास-जगत में तहलका मचा दिया...
पाठकों ने ध्यान दिया होगा कि हमने अपनी प्रथम पुस्तक 'ताजमहल राजपूत प्रासाद था' की भूमिका में अस्पष्ट अनुमान प्रकट किया था कि ताजमहल चौथी शती का हिन्दू प्रासाद हो सकता है। जब हमने बादशाहनामा में यह स्वीकृति पढ़ी कि शाहजहाँ ने यह भवन, जो मानसिंह का भवन कहा जाता था, उसके पौत्र जयसिंह से अधिग्रहण किया तो हमें अपने अनुमान की सत्यता प्रतीत हुई। यद्यपि इससे यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि किस हिन्दू शासक ने इस भवन को बनवाया था। कालान्तर में हमें बटेश्वर अभिलेख देखने को मिला जिसमें उल्लेख है कि ११५५ के लगभग आगरा के आसपास भगवान् शिव का स्फटिक श्वेत मन्दिर बनाया गया।
अब यह अन्य शोधकर्ताओं तथा शासकीय पुरातत्त्व विभागवालों का कर्तव्य कि वे ताजमहल के हिन्दू इतिहास को खोज निकालें। हमें इस बात का पूर्ण सन्देह है कि शाहजहाँ ने ताजमहल के हिन्दू मूल से सम्बन्धित मूल्यवान् प्रमाणों को संगमरमर के चबूतरे के नीचेवाली मंजिल में, जिसमें कहा जाता है कि मुमताज की वास्तविक कब है, दबा दिया है। कीन ने लिखा है कि जो दो सीढ़ियां नीचे की ओर जाती हैं उनको अवरुद्ध कर दिया गया है। सौभाग्य से अब उस मंजिल के नदी-तट की ओर की सीढ़ियों से जाया जा सकता है। किन्तु उस मंजिल का मुख्य भाग सीधे संगमरमर के चबूतरे के नीचे होने के कारण उसे शाहजहां ने ईंट और चूने से बन्द करवा दिया है।
यदि शाहजहाँ को कुछ छिपाना नहीं था तो वह संगमरमर के चबूतरे के नीचे यमुना के स्तर तक की मंजिल और सम्भवतया भूतल के नीचे की भूगर्भस्थ मंजिल को बन्द नहीं करवाता।
हमारी खोज कि ताजमहल शाहजहाँ-पूर्व का हिन्दू भवन था, को कोई यह कहकर अस्वीकार नहीं कर सकता कि हम दृढ़तया शाहजहाँ-पूर्व के इतिहास की स्थापना में असमर्थ रहे हैं।
हमारा यह निष्कर्ष कि शाहजहाँ ताजमहल का निर्माता नहीं है उतना ही महत्त्वपूर्ण है जितना कि किसी न्यायाधिकरण का वह निष्कर्ष जो किसी व्यक्ति को किसी अन्य व्यक्ति की सम्पत्ति की चोरी के अपराध में दण्डित करता है। न्यायालय का निर्णय केवल इस बात पर अमान्य नहीं हो सकता, क्योंकि न्यायालय यह पता लगाने में समर्थ नहीं हो पाया कि चोरी की गई सम्पत्ति का स्वामी कौन है? ताजमहल के निर्माता की खोज करना हमारे अन्वेषण का दूसरा चरण होगा किन्तु उस प्रचलित विश्वास को कि शाहजहाँ ताजमहल का निर्माता था अमान्य करना हमारी खोज का वह प्रथम महत्त्वपूर्ण चरण है जो भावी खोज को उचित दिशा का संकेत देता है।
हम संसार को न केवल इस बात से सावधान करने में ही समर्थ हुए हैं कि जो शाहजहाँ को ताजमहल का निर्माता मानते हैं वे बुरी तरह से मूर्ख बनाए गए हैं, अपितु हम यह संकेत करने में भी समर्थ हुए हैं कि ताजमहल का निर्माता कोई पूर्ववर्ती हिन्दू शासक था। आगामी खोज के लिए जो अत्यन्त मूल्यवान् सहायता हमने प्रदान की है वह है हमारा उस प्रमुख स्थान की ओर स्पष्ट संकेत कर देना जो ताजमहल के मूल के सम्बन्ध में रहस्य को बनाए रखने के लिए छिपा दिया गया था।
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- प्राक्कथन
- पूर्ववृत्त के पुनर्परीक्षण की आवश्यकता
- शाहजहाँ के बादशाहनामे को स्वीकारोक्ति
- टैवर्नियर का साक्ष्य
- औरंगजेब का पत्र तथा सद्य:सम्पन्न उत्खनन
- पीटर मुण्डी का साक्ष्य
- शाहजहाँ-सम्बन्धी गल्पों का ताजा उदाहरण
- एक अन्य भ्रान्त विवरण
- विश्व ज्ञान-कोश के उदाहरण
- बादशाहनामे का विवेचन
- ताजमहल की निर्माण-अवधि
- ताजमहल की लागत
- ताजमहल के आकार-प्रकार का निर्माता कौन?
- ताजमहल का निर्माण हिन्दू वास्तुशिल्प के अनुसार
- शाहजहाँ भावुकता-शून्य था
- शाहजहाँ का शासनकाल न स्वर्णिम न शान्तिमय
- बाबर ताजमहल में रहा था
- मध्ययुगीन मुस्लिम इतिहास का असत्य
- ताज की रानी
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